UP Election 2022: रायबरेली में साख बचाने के लिए कांग्रेस ने नए चेहरों पर रखा हाथ

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Edited By Amrit Vichar
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रायबरेली। आपातकाल हो या फिर राम लहर, कांग्रेस रायबरेली के गढ़ में हमेशा सुरक्षित रही। पहली बार कांग्रेस को घर पर नए चेहरों को उतारकर चुनावी जंग लड़नी पड़ रही है। पूर्व विधायक अदिति सिंह और राकेश सिंह की बगावत से कांग्रेस को भाजपा, सपा से आए बागी चेहरों को अपना बनाना पड़ा है। सदर …

रायबरेली। आपातकाल हो या फिर राम लहर, कांग्रेस रायबरेली के गढ़ में हमेशा सुरक्षित रही। पहली बार कांग्रेस को घर पर नए चेहरों को उतारकर चुनावी जंग लड़नी पड़ रही है। पूर्व विधायक अदिति सिंह और राकेश सिंह की बगावत से कांग्रेस को भाजपा, सपा से आए बागी चेहरों को अपना बनाना पड़ा है। सदर सीट पर तो कांग्रेस ने न्यूरोलाजिस्ट को उतार दिया है। जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा है। कोरोनाकाल में इनका सेवाभाव ही चुनाव रण का तुरुप का इक्का है।

कांग्रेस को रायबरेली में साख बचाने और उम्मीदवारों को जिताने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। दिग्गज कांग्रेसियों के किनारा कर लेने से उम्मीदवारों का संकट खड़ा हुआ, तो दूसरे दलों से आने वाले नेताओं ने कांग्रेस की राह को आसान करने  की  कोशिश की है। पहली बार सभी छह सीटों पर कांग्रेस ने जातीय समीकरण साधते हुए नए चेहरों को उतारा है।

सदर विधानसभा सीट से 2017 में कांग्रेस ने विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह को पहली बार चुनावी मैदान में उतारा और जिताया। इनके बगावत कर भाजपा में चले जाने से कांग्रेस के सामने उम्मीदवार का संकट रहा। दावेदार तो कई थे, लेकिन कांग्रेस पूर्व सांसद अशोक सिंह के बेटे मनीष या फिर उनकी पत्नी को उतारना चाह रही थी, लेकिन अदिति और मनीष का पारिवारिक मामला होने के कारण शायद बात नहीं बनी। ऐन मौके पर कांग्रेस ने नए चेहरे और न्यूरोलाजिस्ट डॉ. मनीष चौहान को टिकट देकर सबको चौंका दिया। मनीष पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

हरचंदपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर राकेश सिंह 2017 में जीते थे लेकिन वह भी भाजपा में चले गए। ऐसे में प्रत्याशी तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि सपा के प्रमुख दावेदार सुरेंद्र विक्रम सिंह उर्फ पंजाबी सिंह का टिकट कटा और उन्होंने कांग्रेस की शरण ली। कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताते हुए उनको टिकट दे दिया।

ऊंचाहार सीट पर वरिष्ठ कांग्रेसी कुंवर हर नारायण सिंह के बेटे पूर्व विधायक अजयपाल सिंह ने भी इस बार चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई और उधर कई साल से क्षेत्र में सक्रिय रहे अतुल सिंह का भाजपा से टिकट कट गया। ऐसे में कांग्रेस से अतुल सिंह पर दांव लगा दिया। अतुल सिंह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। सरेनी सीट पर हाल यह रहा कि पूर्व विधायक अशोक सिंह ने ऐन मौके पर चुनाव लड़ने से हाथ खड़े कर दिए तो कांग्रेस ने विकल्प तलाशना शुरू किया। वहीं सुधा द्विवेदी भाजपा से टिकट मांग रही थीं।

जब भाजपा ने सुधा को टिकट नहीं दिया तो कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर भाजपा को हराने के लिए कांटे से कांटा निकालने की तरकीब लगा दी।  बछरावां सुरक्षित सीट से कांग्रेस ने सुशील पासी और सलोन सुरक्षित से अर्जुन पासी को मैदान में उतारा है। इन दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। सबसे पहले कांग्रेस ने इन्हीं दो उम्मीदवारों की घोषणा की थी।

सलोन से अर्जुन पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बछरावां से सुशील पासी कई बार चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके।अब ये नए चेहरे कांग्रेस को कितना मजबूत करते हैं यह तो चुनाव परिणाम तय करेंगे। हालांकि पहली बार कांग्रेस को साख बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।

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