पीलीभीत: पीटीआर के जंगल और अमरिया से नौ बाघ लापता
पीलीभीत,अमृत विचार। जहां एक तरफ पीटीआर के जंगल में बाघों की संख्या बढ़ने पर खुशी जाहिर कर रहे हैं, तो वहीं पीटीआर के जंगल और अमरिया क्षेत्र में रहने वाले नौ बाघ रहस्मय ढंग से लापता हो गए हैं। इसको लेकर वन्यजीव प्रेमी ने पीसीसीएफ के अपर मुख्य सचिव वन को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय …
पीलीभीत,अमृत विचार। जहां एक तरफ पीटीआर के जंगल में बाघों की संख्या बढ़ने पर खुशी जाहिर कर रहे हैं, तो वहीं पीटीआर के जंगल और अमरिया क्षेत्र में रहने वाले नौ बाघ रहस्मय ढंग से लापता हो गए हैं। इसको लेकर वन्यजीव प्रेमी ने पीसीसीएफ के अपर मुख्य सचिव वन को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है।
पीलीभीत के जंगल को 2013 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद बाघों के संरक्षण पर तेजी से काम किया गया था। इसके बाद वर्ष 2019 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और टाइगर रिजर्व की ओर से गणना कराई गई तो पीटीआर के जंगल में 65 से अधिक बाघ मिले थे। इसके अलावा जंगल के बाहर अमरिया क्षेत्र में भ्रमण करने वाले बाघों की संख्या 15 बताई गई थी।
लेकिन पिछले छह माह से अमरिया और जंगल के भीतर रहने वाले बाघों की संख्या कम हो रही है। मामला संज्ञान में आने के बाद वाइल्ड लाइफ फोटो जर्नलिस्ट बिलाल खां ने पीसीसीएफ के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की शिकायत की है। शिकायतकर्ता ने बताया कि इस वक्त जंगल और अमरिया से नौ बाघ लापता है।
जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। उनके मुताबिक माला रेंज, बराही और अमरिया से बाघ लापता हुए हैं। पहले अमरिया में 15 बाघ मौजूद थे, लेकिन अब वहां सिर्फ 12 बाघ ही रह गए हैं। इन लापता बाघों को लेकर अफसर दावा कर रहे हैं कि उत्तराखंड का बॉर्डर खुला होने के कारण बाघों की आवाजाही रहती है।
इसलिए उनका पता नहीं चल रहा। लेकिन उत्तराखंड के जंगल में भी उन बाघों का कोई सुराग नहीं लगा है। उन्हें अंदेशा है कि पीटीआर के जंगल में लगातार शिकार के लिए हो रही घुसपैठ ने कहीं बाघों के साथ कोई अप्रिय घटना तो घटित नहीं कर दी है। इस मामले में उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच करने की मांग की है।
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