अनोखा शिव मंदिर, जिसका निर्माण एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक ही रात में किया, लेकिन इस वजह से नहीं होती है यहां पूजा
देवभूमि उत्तराखंड में भगवान शिव के यूं तो अनगिनत ऐसे धाम हैं जिनके दर्शनों के लिए देश-दुनिया के आस्थावान लोग जुटते हैं। पिथौरागढ़ जिले में थल के पास अल्मियां और बलतिर नाम के दो गांव स्थित हैं। अल्मियां और बलतिर गांव के बीच एक चट्टान है जिसे भोलियाछीड़ कहा जाता है। इसी चट्टान पर भगवान …
देवभूमि उत्तराखंड में भगवान शिव के यूं तो अनगिनत ऐसे धाम हैं जिनके दर्शनों के लिए देश-दुनिया के आस्थावान लोग जुटते हैं। पिथौरागढ़ जिले में थल के पास अल्मियां और बलतिर नाम के दो गांव स्थित हैं। अल्मियां और बलतिर गांव के बीच एक चट्टान है जिसे भोलियाछीड़ कहा जाता है। इसी चट्टान पर भगवान शिव का अनोखा मंदिर स्थित है। हालांकि इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि यह मंदिर कब बना लेकिन इसके स्थापत्य को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मंदिर का निर्माण कत्यूर साम्राज्य में हुआ था। बताया जाता है कि आठवीं सदी में बना यह मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक ही रात में किया था।

इस मंदिर का शिवलिंग दक्षिणमुखी है जिसे उत्तरमुखी होना चाहिए। कहा जाता है कि रात के अंधेरे में दिशाभ्रम होने की वजह से शिल्पकार ने दक्षिणमुखी शिवलिंग का निर्माण कर दिया। दक्षिणमुखी शिवलिंग होने के कारण ही इस मंदिर में कभी पूजा नहीं की जाती है। मंदिर के पास स्थित नौले में स्थानीय लोग लोकपर्वों पर जुटते हैं लेकिन मंदिर में पूजा अर्चना नहीं करते हैं। धार्मिक मान्यता से इतर यह मंदिर अपने अनूठे स्थापत्य के लिए जाना जाता है।
इस मंदिर के निर्माण के विषय में कहा जाता है कि भोलियाछीड़ चट्टान के पास स्थित गांव में गुणी शिल्पकार रहता था। एक बार किसी दुर्घटना में उसका एक हाथ काम करने योग्य न रहा। जब शिल्पी का एक हाथ न रहा तो गांव के लोगों ने ताने मारकर शिल्पकार को परेशान करना शुरू कर दिया। परेशान होकर शिल्पी ने एक रात अपनी छिनी और हथौड़ा लेकर गांव के दक्षिण में रातों रात चट्टान काटकर मंदिर का निर्माण कर दिया और फिर कभी गांव न लौटा।
दूसरी मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण करने वाले शिल्पकार ने इससे पहले किसी क्रूर राजा के लिए एक सुंदर महल बनाया था। भविष्य में शिल्पकार दूसरा कोई सुंदर महल न बना सके इसलिए राजा ने उसका एक हाथ काट दिया। शिल्पकार ने राजा को सबक सिखाने के लिए एक रात में अनूठे शिव मंदिर का निर्माण कर दिया। इस मंदिर में चट्टान काटकर बनाया गया शिवलिंग देखकर इन कहानियों में कुछ सार्थकता भी नजर आती है।
