इटावा: भाव के अभाव में ‘मुरझाया’ लहसुन किसान
इटावा। गंभीर बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका अदा करने वाले लहसुन के भाव मे भारी गिरावट ने किसानों के चेहरों की हवाईयां उड़ा दी है। 20 हजार रुपये कुंटल बिकने वाला लहसुन के भाव औंधे मुंह गिरे हैं, नतीजन आज इस फसल का भाव सिर्फ एक हजार रुपये कुंटल आंका जा रहा है। भाव …
इटावा। गंभीर बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका अदा करने वाले लहसुन के भाव मे भारी गिरावट ने किसानों के चेहरों की हवाईयां उड़ा दी है। 20 हजार रुपये कुंटल बिकने वाला लहसुन के भाव औंधे मुंह गिरे हैं, नतीजन आज इस फसल का भाव सिर्फ एक हजार रुपये कुंटल आंका जा रहा है।
भाव के अभाव में लहसुन किसान अब दूसरी खेती की ओर से मुड़ना शुरू हो गये है। लहसुन फसल में हर साल हो रहे घाटे के कारण किसानों की ओर से ऐसा कदम उठाना बताया जा रहा है। लहसुन किसानों को उनकी फसल का बाजिब भाव के ना मिलने के कारण ताखा क्षेत्र में लहसुन का रकबा लगातार घटता जा रहा है। इटावा जिले में पिछले सात साल में लहसुन पैदावार का रकबा 4540 हेक्टेयर घट गया है। पहले 5000 से अधिक हेक्टेयर में लहसुन की खेती होती थी। अब केवल 460 हेक्टेयर में ही किसान लहसुन की खेती कर रहे हैं।
इलाकाई किसानों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार एक बीघे में मजदूरी समेत करीब 10 हजार रुपये लागत आती है। प्रति बीघा तीन कुंतल उपज होती है। थोक मंडी में भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से ही मिल पाता है। इससे लागत भी नहीं मिल पाती है। इस कारण किसान लहसुन को छोड़कर अन्य फसलों की बुवाई करने लगे हैं।
किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष लहसुन की उपज अच्छी हुई है। भाव तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल से शुरू हुए और दिन पर दिन घटते ही गए। इस समय भाव 500 रुपये 1300 रुपये कुंतल है। अभी लहसुन की फसल तैयार होने में लगभग दो महीने का समय है। विशेषज्ञ किसानों ने बताया कि किसान एक ही खेत में कई साल से लहसुन की बुवाई कर रहे हैं। इससे लहसुन की गुणवत्ता घटती जा रही है। इस कारण भी भाव कम हो रहा है।
इस बार राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी लहसुन का रकबा बढ़ गया है। इससे भाव और कम होने की आशंका है। कुदरैल के लहसुन किसान चक्रेश अग्निहोत्री ने बताया कि पिछले चार सालों से लगातार लहसुन की फसल में घाटा हो रहा है। लहसुन से मजदूरी का रुपया तक नहीं निकल रहा है।
बदकनशाहपुर लहसुन किसान मुकेश शाक्य ने कहा कि पहले छह कुंतल बीघा की उपज थी अब घटकर तीन कुंतल बीघा रह गई है। इस कारण भी किसान को घाटा हो रहा है। मौहरी के लहसुन किसान कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि बीते वर्षों में महंगाई की वजह से भी लागत अधिक आई और मुनाफा कम हुआ। किसानों ने घाटे की वजह से लहसुन की खेती करना कम कर दिया है।
केशोंपुर निवासी किसान शिवराम सिंह का कहना है कि महंगाई की वजह से लागत में बढ़ोतरी आयी लेकिन कभी लहसुन के भाव अच्छे नहीं मिले जिससे किसानों के लिए लहसुन की खेती घाटे की रही।
लहसुन किसान जमील अहमद कहते हैं कि जिसने लहसुन की फसल कर्ज लेकर तैयार की थी, वह किसान तो इस बार बर्बादी की कगार पर है। क्योंकि पिछले साल भी भाव कम होने से किसानों को घाटा उठाना पड़ा था। फिलहाल भाव बढ़ा तो ठीक नहीं तो भगवान ही मालिक है।
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