कल है महाशिवरात्रि, जानें क्या न करें अर्पित, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा आराधना की जाती है। इस बार ये पर्व 1 मार्च 2022 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन माता पार्वती और शिव शंकर का विवाह हुआ था। इसलिए इस पूजा को हमारे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आचार्य अनूप मिश्रा ने बताया …
इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा आराधना की जाती है। इस बार ये पर्व 1 मार्च 2022 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन माता पार्वती और शिव शंकर का विवाह हुआ था। इसलिए इस पूजा को हमारे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आचार्य अनूप मिश्रा ने बताया कि मान्यता है के अनुसार इस पूजा को करने से भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है। भगवान शिव के भक्तों के बीच महाशिवरात्रि के पर्व का बहुत महत्व है जो पूरी धूम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जानें इस साल यह त्योहार कब मनाया जा रहा है और क्या है इसका शुभ मुहूर्त।
शुभ मुहूर्त
आचार्य अनूप मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से दोपहर 02 बजकर 53 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। शाम 05 बजकर 48 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा।
महाशिवरात्रि पर ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प ले। अगर हो सके तो नंगे पैर भगवान शिव के मंदिर जाएं। मिट्टी या तांबे के लोटे में पानी या दूध भरकर ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि जालकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए। साथ ही महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है। शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि का पूजा निशील काल में करना उत्तम माना गया है। हालांकि भक्त अपनी सुविधानुसार भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात
ये अर्पित न करें
केतकी का फूल भी महादेव की पूजा में कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। महादेव ने केतकी के फूल को श्राप दिया था कि उनकी पूजा में केतकी का फूल कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। तुलसी पूर्व जन्म में वृंदा थीं। उनके पति का नाम जलंधर था। जलंधर का वध शिव जी ने किया था, तब तुलसी ने स्वयं को महादेव की पूजा में शामिल करने से इनकार कर दिया था। तब से आज तक महादेव की पूजा में तुलसी प्रयोग नहीं की जाती। हल्दी और रोली का इस्तेमाल भी महादेव की पूजा में नहीं किया जाता। महादेव वैरागी हैं और वे अपने माथे पर राख लगाते हैं. इसके अलावा रोली लाल रंग की होती है।
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