लखीमपुर-खीरी: युवराजदत्त महाविद्यालय में हुआ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। युवराज दत्त महाविद्यालय लखीमपुर खीरी में विज्ञान संकाय द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम “दीर्घकालिक भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” है। कार्यक्रम का संचालन व विषय प्रवर्तन करते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर …
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। युवराज दत्त महाविद्यालय लखीमपुर खीरी में विज्ञान संकाय द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम “दीर्घकालिक भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” है। कार्यक्रम का संचालन व विषय प्रवर्तन करते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सतेंद्र पाल सिंह ने दीर्घकालिक सतत विकास को परिभाषित करते हुए विज्ञान और तकनीकी के विभिन्न क्षेत्रों में एकीकरण के फलस्वरूप बनी नई शाखाओं जैसे बायो टेक्नोलॉजी, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, जैव भौतिकी तथा नैनो टेक्नोलॉजी के विभिन्न आयामों पर तथा सतत विकास में इनके महत्व पर चर्चा की।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए बीएससी तृतीय वर्ष (गणित) के छात्र अमित कुमार, बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा कीर्ति गौतम ने सर सीवी रमन की जीवनी पर विस्तार से बताया। बीएससी प्रथम सेमेस्टर (गणित) के छात्र अमन रावत, बीएससी द्वितीय वर्ष (गणित) की छात्रा उदिता सिंह, बीएससी द्वितीय वर्ष (जीव विज्ञान) के छात्र हर्षित सोनी, बीएससी तृतीय वर्ष (जीव विज्ञान) के छात्र ब्रज मोहन मौर्य तथा बीएससी प्रथम सेमेस्टर (जीव विज्ञान) की छात्रा संध्या सिसोदिया ने इस वर्ष की थीम पर आधारित अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
गणित विभागाध्यक्ष मोहम्मद आमिर ने सतत विकास, सतत विकास के लक्ष्य तथा इनकी प्राप्ति के लिए मैथमेटिकल मॉडलिंग के सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा की, भौतिक विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश शुक्ला ने रमन प्रभाव, रमन स्पेक्ट्रम एवं भौतिक विज्ञान में उनके अप्रतिम योगदान तथा जीवन वृतांत के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम के सयोंजक तथा वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ डीके सिंह ने सतत विकास में ट्रांसजेनिक पौधों, अगुणित पौधों तथा उन्नत किस्मों के विकास में हरित क्रांति के जनक डॉ एमएस स्वामीनाथन और नार्मन बर्लोग के योगदान पर चर्चा की, अध्यक्षीय वक्तव्य में प्राचार्य प्रो. डॉ हेमंत पाल ने सतत विकास को समझाते हुए थ्री आर रिड्यूस , रीयूज़ तथा रिसाइक्लिंग के सिद्धांत पर बल दिया तथा साथ ही साथ छात्र-छात्राओं को विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया, कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गए। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ अजय कुमार आगा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य व कॉमर्स असोसिएट प्रोफेसर डॉ डीएन मालपानी, कॉमर्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ० आरपीएस तोमर , अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ नीलम त्रिवेदी, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ० नूतन सिंह , अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ० ज्योति पंत ,कॉमर्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ० एसके पांडेय, मुख्य अनुशासक डॉ० सुभाष चंद्रा ,भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ इष्टविभु , जंतु विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आकाश वार्ष्णेय, शारारिक शिक्षा विभागाध्यक्ष मनोज कुमार, हिंदी विभागाध्यक्ष देशराज , जंतु विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ ओपी सिंह ,अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक बाजपेई , दर्शनशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विनोद सिंह तथा महाविद्यालय के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
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