रायबरेली: यूक्रेन से लौटे छात्र ने सुनाई व्यथा, कहा- भयानक हैं हालात, तीस किलोमीटर तक चलना पड़ा पैदल
रायबरेली। यूक्रेन से बस पर सवार होकर रोमानिया की सीमा पर पहुंचे तो आगे का मार्ग रुका हुआ था । मजबूरी में पचास छात्रों के जत्थे को तीस किमी पैदल सफर तय करके आगे पहुंचे तब उनको वतन वापसी की राह आसान हुई। इस दुश्वार भरे सफर को तय करके अपने घर महराजगंज पहुंचे नितिन …
रायबरेली। यूक्रेन से बस पर सवार होकर रोमानिया की सीमा पर पहुंचे तो आगे का मार्ग रुका हुआ था । मजबूरी में पचास छात्रों के जत्थे को तीस किमी पैदल सफर तय करके आगे पहुंचे तब उनको वतन वापसी की राह आसान हुई। इस दुश्वार भरे सफर को तय करके अपने घर महराजगंज पहुंचे नितिन दिवाकर को देखकर पूरा गांव भावुक हो गया।
रूस और यूक्रेन की जंग के बीच यूक्रेन में फंसे एमबीबीएस एम डी के छात्र नितिन दिवाकर सोमवार रात 12 बजे अपने घर पहुंचे। इन्हें बस व हवाई जहाज का सहारा मिला तो जीवन में पहली बार 30 किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा। इकलौते बेटे को देख परिजनों की आंखें भर आई। परिवार में खुशी का माहौल है। छात्र की बातों को सुन आसपास के लोग भी हैरान हो गए।
क्षेत्र के हलोर गांव निवासी नितिन दिवाकर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद एमडी कर रहे हैं। 2 सितंबर 2021 को यूक्रेन के इवानो शहर गए थे। 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। दोनों के बीच जंग छिड़ी है। कुल ढाई दिनों तक जंग के बीच नितिन यूक्रेन में ही रहे डरे सहमे नितिन किसी तरह यूक्रेन से सोमवार रात 12:00 बजे अपने घर पहुंचे। नितिन ने बताया कि 24 फरवरी को इवानो शहर में रूस ने सुबह 6:00 बजे हमला किया था।
हमले के बाद यहां अलर्ट हो गया था ।क्षेत्र में कर्फ्यू लग गया था। रात्रि 8:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक अपने कमरे में लाइट तक नहीं जला सकते थे ।हमले के बाद डरे सहमें नितिन किसी भी परिस्थिति से निपटने को तैयार हो गए थे उन्होंने बताया कि उनकी यूनिवर्सिटी 27 फरवरी को भारत भेजने की बात कर रही थी। लेकिन उन्होंने दूतावास के टोल फ्री नंबर पर बात कर सलाह ली तो उन्हें दूतावास द्वारा बताया गया कि भारतीय रोमानिया ,पोलैंड ,या फिर हंगरी बॉर्डर से अपने वतन जा सकते हैं। उनके ग्रुप के50 लोगों ने आपस में बात की , आपस में एक दूसरे से सलाह हुई और स्वयं के निर्णय से वतन वापसी का किसी भी हालत में फैसला कर लिया। उन लोगों ने 1 लाख रुपए में एक बस बुक कर ली।
उन्हें इवानों से लगभग 200 किलोमीटर रोमानिया बॉर्डर पहुंचना था , रोमानिया बॉर्डर पर अधिक भीड़ होने के कारण 30 किलोमीटर पहले ही बस से उन्हें उतरना पड़ा। 50 छात्रों का जत्था 30 किलोमीटर पैदल ही चलकर रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। यहां दूतावास लोग भोजन इत्यादि करा कर उन्हें एयरपोर्ट ले गए। 26 फरवरी की देर रात जहाज से वह दिल्ली पहुंचे।
दिल्ली के यूपी भवन में इन्हें लगभग 3 घंटे तक रोका गया। भोजन की व्यवस्था भी कराई गई। उसके बाद इनोवा गाड़ी से उन्हें उनके घर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि रोमानिया बॉर्डर से उनके घर तक पहुंचने तक का किराया उन्हें नहीं देना पड़ा। भारत सरकार ने ही यह किराया वहन किया है। घर पहुंच कर अपने आप को बेहद खुश महसूस कर रहे हैं। मानो मौत के मुंह से वह वापस आए हो। घर पहुंचते ही उनकी मां सरोज ने उन्हें अपने गले से लगाया। बहन पिंकी की भी आंखें भर आई। आसपास के लोग भी उनसे मिलने उनके घर पहुंच रहे हैं।
यूक्रेन से वापस आए छात्र नितिन ने बताया कि अभी भी लगभग 10 से 12000 छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। भारत सरकार यदि फ्लाइटों की संख्या बढ़ा दे तो जल्द से जल्द छात्र वतन वापस आ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया धन्यवाद
यूक्रेन से लौटे छात्र नितिन ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भारत सरकार इतनी जल्दी उन्हें वतन वापस बुला लेगी। भारत सरकार उम्मीद से अधिक काम कर रही है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहां है ।उनके परिजन भी नरेंद्र मोदी को लाख-लाख धन्यवाद देते नहीं थक रहे हैं।
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