लखनऊ: कर्मचारियों के आवासों की मरम्मत के नाम पर हर महीना ढाई लाख हजम कर रहा वन विभाग!
गौरी त्रिवेदी/अमृत विचार/लखनऊ। वन विभाग के अधिकारी मुख्य दफ्तर के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का प्रतिमाह ढाई लाख रुपया हजम कर रहे हैं। मरम्मतीकरण के नाम पर ढाई सौ से अधिक कर्मचारियों के वेतन से हर माह कटने वाले 250 रुपयों का हिसाब वन विभाग के पास नहीं है। आलम यह है कि कर्मचारियों के …
गौरी त्रिवेदी/अमृत विचार/लखनऊ। वन विभाग के अधिकारी मुख्य दफ्तर के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का प्रतिमाह ढाई लाख रुपया हजम कर रहे हैं। मरम्मतीकरण के नाम पर ढाई सौ से अधिक कर्मचारियों के वेतन से हर माह कटने वाले 250 रुपयों का हिसाब वन विभाग के पास नहीं है।
आलम यह है कि कर्मचारियों के आवासों के मरम्मतीकरण के नाम पर कटने वाले पैसे से अभी तक एक भी कर्मचारी के आवास की मरम्मत नहीं कराई गई है। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कर्मचारियों के वेतन से कटने वाले पैसे कहां जा रहे हैं? जिसे लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में काफी रोष भी देखने को मिल रहा है। जब कि इस विषय पर अधिकारी हर बार बचाव करते दिखाई देते हैं।
कर्मचारियों के आवासों के बाहर जमा है गंदगी
बता दें कि वन विभाग के नरही स्थित मुख्य दफ्तर के कर्मचारियों के आवासों के बाहर गंदगी का अंबार है, जिससे वहां अपने परिवार के साथ रह रहे कर्मचारियों का जीना मुहाल है। नाम न छपने की शर्त पर कई कर्मचारियों ने यहां तक कहा कि यहां रहना किसी नर्क से कम नहीं है। इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार अवगत भी कराया गया। बावजूद हर बार आश्वासन के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगा।
मकानों में सोते समय लगता है डर
एक कर्मचारी ने बात-चीत के दौरान बताया कि वह यहां पर अपने पूरे परिवार के साथ रहता है, जब रात में जर्जर मकान में सोता है तो उसे सदैव यह डर सताता है कि रात में कहीं छत बच्चों के ऊपर न गिर जाए। खासतौर पर बारिश के मौसम में जब देर रात बरसात होती है तो उस समय का मंजर पूरे परिवार को डरा देता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि पूरी रात जाग कर गुजारी जाती है। साथ ही बताया कि यहां पर रोजाना सफाई की बात तो बहुत दूर कि है, सफाई का महीने-महीने भर काम नहीं किया जाता।
हमारे पास जो भी संसाधन उपलब्ध है। उसके आधार पर विभाग द्वारा मरम्मत कराई जाती है। हम अधिक से अधिक मरम्मतीकरण के पैसे की मांग का प्रस्ताव भी रख चुके हैं, जिससे अधिक से अधिक काम कराया जा सके। वरीयता के आधार पर मरम्मत भी कराई जाती है। हालांकि पैसे का आभाव होने के कारण हम उस स्तर तक मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं।
डा. रवि सिंह, डीएफओ अवध
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