2050 तक हर चौथे आदमी को झेलना पड़ेगा कम सुनने का दंश: प्रो. अमित केसरी

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लखनऊ। उम्र बढ़ने के साथ बहुत से लोगों में श्रवण की क्षमता घट रही है या यूं कहें कि उनके सुनने की क्षमता कम हो रही है,तो गलत ना होगा। यदि समय रहते कानों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो साल 2050 तक स्थिति भयावह हो सकती है, यह कहना है एसजीपीजीआई के …

लखनऊ। उम्र बढ़ने के साथ बहुत से लोगों में श्रवण की क्षमता घट रही है या यूं कहें कि उनके सुनने की क्षमता कम हो रही है,तो गलत ना होगा। यदि समय रहते कानों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो साल 2050 तक स्थिति भयावह हो सकती है, यह कहना है एसजीपीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग स्थित न्यूरोओटोलॉजी यूनिट के एडिशनल प्रोफेसर अमित केसरी का। उन्होंने यह बात विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर अमृत विचार के साथ बातचीत करते हुए कही।

डॉ अमित केसरी के मुताबिक मौजूदा दौर में ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है,लोग कानों में लीड लगाकर लगातार फोन पर बात करते हैं, गाने सुनते हैं और यह सब कुछ तीव्र ध्वनि के साथ किया जा रहा है। जिसका सीधा असर लोगों की सुनने की क्षमता पर पढ़ रहा है,यही हालात रहे तो साल 2050 तक चार में से एक आदमी कम सुनने की समस्या से ग्रसित होगा। उन्होंने बताया यह बात वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कही है।

डॉ अमित केसरी ने बतया कि लोगो मे कम सुनने की बढ़ती समस्या का कारण जो अब तक सामने आया है, उसमें प्रमुख रूप से तेज ध्वनि, कान का संक्रमण, किडनी की बीमारी, मधुमेह, कानों में इन्फेक्शन, दवाओं का अधिक सेवन करना शामिल है।

डॉ अमित केसरी ने बताया कि भारत में 6 लाख 30 हजार लोग सुनने की समस्या से जूझ रहे।  इनमें से 60  साल से ज्यादा उम्र के 67% लोग हैं, वही 40 से 60 साल के बीच करीब 40 फ़ीसदी लोग कम सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव की बात करें तो करीब 32.4 फ़ीसदी तथा शहरी क्षेत्र में 26.1 प्रतिशत आबादी कम सुनने की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 1000 में से 6 से 8 लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिनमें से 2 से 4 लोग वयस्क हैं।

कम सुनाई पड़ना जीवन को करता है प्रभावित

डॉ अमित केसरी ने बताया कि कम सुनाई पड़ने की समस्या जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते इस समस्या का इलाज नहीं कराया जाता है,तो यह याददाश्त पर असर डाल सकता है, जो लोग कम सुनाई पड़ने की समस्या को हल्के में लेते हैं,धीरे-धीरे उनकी याददाश्त कम होती जाती है। इतना ही नहीं उस शख्स की एकाग्रता में भी कमी आती है। जिससे उसका मन काम में नहीं लगता। कम सुनाई पड़ने की वजह से समाज से कटना, अकेलापन तो व्यक्ति को झेलना ही पड़ता है, साथ ही इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।

श्रवण की समस्या हो तो जल्द से जल्द करायें इलाज

डॉ अमित केसरी ने बताया कि बुजुर्ग, बच्चे या फिर वयस्क किसी को भी कम सुनने की समस्या हो सकती है, इसका जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते कम सुनने का पता चल जाए,तो तत्काल उसका इलाज कराना चाहिए,समस्या का जल्द पता चलने से दवा से इलाज सम्भव है, नहीं तो मशीन अथवा इंप्लांट के माध्यम से सुनने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर डॉ. अमित केसरी ने सुनो-सुनाओ पुस्तक का विमोचन भी किया।

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