No Smoking Day Special : 304 रोगियों में से सिर्फ तीन ने छोड़ा धूम्रपान
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को धूम्रपान रहित दिवस (नो स्मोकिंग डे) मनाया जाता है। जिले में जिला अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक में धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए काउंसलर से मनोवैज्ञानिक की तैनाती से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता भी नियुक्त हैं। जो जिला परामर्शदाता तंबाकू नियंत्रण के नियंत्रण में तंबाकू …
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को धूम्रपान रहित दिवस (नो स्मोकिंग डे) मनाया जाता है। जिले में जिला अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक में धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए काउंसलर से मनोवैज्ञानिक की तैनाती से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता भी नियुक्त हैं।
जो जिला परामर्शदाता तंबाकू नियंत्रण के नियंत्रण में तंबाकू व धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए क्लीनिक में आने वालों को परामर्श और इलाज देते हैं। इसके बावजूद मुरादाबाद में सरकारी आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि जिले में धूम्रपान की लत घातक रूप ले रही है। 2021 की आखिरी तिमाही में 304 रोगी इस क्लीनिक में आए, लेकिन लत केवल तीन ने छोड़ी। जिला अस्पताल की ओपीडी में संचालित एनसीडी क्लीनिक में 2021 की अंतिम तिमाही अक्टूबर से दिसंबर तक 304 रोगी ऐसे आए। इन्हें बीड़ी पीने, तंबाकू खाने, सिगरेट पीने या बहुतेरों में बीड़ी व तंबाकू सेवन दोनों की लत थी। क्लीनिक में मनौवैज्ञानिक व सामाजिक कार्यकर्ता की काउंसिलिंग के बाद भी इन तीन महीने में आए 304 में से केवल तीन ही अब तक इस लत से निजात पा सके हैं। शेष के लिए प्रयास व इलाज जारी है।
धूम्रपान के नुकसान : एनसीडी क्लीनिक की जिला मनोवैज्ञानिक रीमा यादव कहती हैं कि धूम्रपान व तंबाकू गुटखे के सेवन से हृदय और खून के प्रवाह को नुकसान पहुंचाता है। इससे कॉरोनरी हार्ट रोग यानी दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक रहती है। धूम्रपान से पेरिफेरल वस्कुलर रोग में धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। सेरेब्रोवस्कुलर रोग उन धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे दिमाग में रक्त प्रवाह में रुकावट होती है। धूम्रपान से फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचता है इससे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पाल्मनरी रोग, ब्रोंकाइटिस की बीमारी हो सकती है। धूम्रपान श्वसन अवस्था के लक्षणों को और बढ़ा सकता है इससे फेफड़े का कैंसर, अस्थमा, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट संक्रमण की आशंका अधिक होती है।
एनसीडी क्लीनिक में आने वाले धूम्रपान व तंबाकू सेवन करने वालों को काउंसिलिंग व निकोटेक्स की मदद से इलाज किया जाता है। 304 ऐसे रोगियों की क्लीनिकल काउंसिलिंग व निकोटेक्स के माध्यम से इस लत को छुड़ाने का प्रयास जारी है। अभी केवल तीन ने लत छोड़ी है। अन्य को भी बेहतर जीवन की राह दिखाकर धूम्रपान से दूरी बनाने को प्रेरित कर रहे हैं। इसमें परिवार व समाज के लोगों का भी अहम योगदान है। सभी का नियमित फालोअप करते हैं और जरूरत पर एनजीओ की मदद भी लेते हैं। -रीमा यादव, मनोवैज्ञानिक सलाहकार जिला एनसीडी क्लिनिक
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