यूपी चुनाव 2022:…तो बसपा के हाथी ने सपा की साइकिल रौंद कर सींच दिया कमल

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सीतापुर। चुनावी परिणाम आने के बाद अब लोगों ने अपने तरीके से समीक्षा शुरू कर दी है। कोई जातियों के बंटवारे को हार-जीत के पैमाने से नाप रहा है, तो कोई राशन, आवास को भाजपा की जीत का फैक्टर मान रहा है। लेकिन राजनैतिक पंडित जिले में सपा की बुरी हार और भाजपा की प्रचंड …

सीतापुर। चुनावी परिणाम आने के बाद अब लोगों ने अपने तरीके से समीक्षा शुरू कर दी है। कोई जातियों के बंटवारे को हार-जीत के पैमाने से नाप रहा है, तो कोई राशन, आवास को भाजपा की जीत का फैक्टर मान रहा है। लेकिन राजनैतिक पंडित जिले में सपा की बुरी हार और भाजपा की प्रचंड जीत के मायके कुछ और ही निकाल रहे हैं। जिले के चुनावी नतीजे इस बात की तस्दीक करते हैं कि राशन, आवास जैसे मुददों के साथ ही बसपा के टिकट बंटवारे ने भाजपा को फायदा और सपा को बड़ा आघात पहुंचाया है।

नतीजों से साफ नजर आता है कि बसपा के हाथी ने सपा की साइकिल रौंद कर भाजपा के कमल सींच दिया। सपा को जिले में उम्मीदों से बेहद कम, सिर्फ एक सीट मिली, जबकि भाजपा ने आजादी से लेकर अब तक के अपने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। जिले की नौ में से आठ सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा की इतनी प्रचंड जीत तो राम लहर में भी नहीं हुई थी। दरअसल जिले की सभी सीटों पर बसपा की प्रत्याशियों के चयन से साफ तौर पर प्रतीत हो रहा है कि बसपा ने ऐसे उम्मीदवार उतारे जो सीधे तौर पर सपा को नुकसान पहुंचाने वाले थे।

सदर सीट को ही ले-लिजिए? बसपा यहां मुस्लिम, खास तौर से अंसारी बिरादरी का उम्मीदवार ढूंढ रही थी, क्योंकि सदर सीट पर मुस्लिमों में सबसे अधिक अंसारी वोट बैंक है। जब सदर क्षेत्र में अंसारी दावेदार नहीं मिला तो बाहर से खुर्शीद अंसारी को लाकर लड़ा दिया। बाहरी होने के बाद भी खुर्शीद को 16926 वोट मिले। जिसके नतीजें में सपा की सबसे पक्की सीट मानी जानी वाली सदर में सपा के राधेश्याम जायसवाल महज 1253 वोट से भाजपा के राकेश राठौर गुरू से चुनाव हार गए। इसी तरह मुस्लिमों की अच्छी आबादी वाली बिसवां सीट पर सपा के अफजाल कौसर के खिलाफ बसपा ने हाशिम अंसारी को उतारा।

यहां हाशिम अंसारी को 24086 वोट मिला। नतीजतन सपा के अफजाल, भाजपा के निर्मल वर्मा से 10478 वोटाें से हर गए। कुछ ऐसे ही नतीजे महोली विधान सभा क्षेत्र में भी देखने को मिले। यहां सपा के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के खिलाफ बसपा ने वर्मा विरादरी के डाक्टर राजेंद्र प्रसाद वर्मा को चुनावी मैदान में उतारा। इस सीट पर वर्मा बिरादरी का अच्छा वोट माना जाता है। माना जा रहा था कि अनूप गुप्ता को इस बिरादरी को अच्छा वोट मिल सकता था, लेकिन यहां अनूप के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बसपा के राजेंद्र प्रसाद वर्मा को 25507 वोट मिला।

इसके परिणाम में अनूप गुप्ता 12172 वोटों से भाजपा के शशांक त्रिवेदी से चुनाव हार गए। महमूदाबाद विधान सभा सीट पर कई बार विधायक रहे पूर्वमंत्री सपा उम्मीदवार नरेंद्र वर्मा के खिलाफ बसपा ने पूर्वमंत्री अम्मार रिजवी के मीसम अम्मार रिजवी को टिकट दिया। मीसम रिजवी को 35304 वोट मिला। जिसके फलस्वरूप सपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह वर्मा 5222 वोटों से भाजपा की आशा मौर्या से चुनाव हार गए। यहां महमूदाबाद व आसपास के इलाके में अच्छा मुस्लिम वोट बैंक है।

इसी तरह हरगांव सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र में सपा उम्मीदवार पूर्वमंत्री रामहेत भारती के सामने बसपा ने उन्हीं की बिरादरी के रानू चौधरी को उतार दिया। रानू चौधरी को 16226 वोट मिले। यहां से सपा प्रत्याशी रामहेत भारती लंबे अंतर से भाजपा के सुरेश राही से शिकस्त खा गए। सेवता विधान सभा सीट से बसपा ने सपा उम्मीदवार महेंद्र सिंह झीनबाबू के खिलाफ आशीष प्रताप सिंह को चुनाव लड़ा दिया। आशीष सिंह को 17054 वोट मिले। नतीजे में सपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह झीनबाबू, भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी से भारी अंतर से चुनाव हार गए। कुछ ऐसा ही हाल सिधौली व मिश्रिख क्षेत्र का भी बताया जा रहा है।

हालांकि लहरपुर विधान सभा क्षेत्र से सपा के अनिल वर्मा ने भाजपा के सुनील वर्मा को चुनाव मैदान में पटखनी दे दी। बसपा ने बड़े मुस्लिम वोट बैंक वाली इस सीट पर भी पूर्वमंत्री बुनियान हुसैन अंसारी को चुनाव में उतारा था। उन्हें 19809 वोट मिले, लेकिन इसके बाद भी लोकप्रिय नेता सपा के अनिल वर्मा चुनाव जीत गए। इन आंकड़ों को लेकर सूत्रों का दावा है कि सपा के जिले में हार के पीछे बसपा का टिकट बंटवारा सबसे बड़ा फैक्टर रहा है।

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