शाहजहांपुर: छोटे कद के बड़े नेता बन चुके हैं चेतराम, छह बार बन चुके हैं विधायक
शाहजहांपुर, अमृत विचार। सुरेश कुमार खन्ना भले ही शहर सीट से नौवीं बार विधायक बनकर अजेय चल रहे हों, लेकिन पुवायां विधायक चेतराम भी बर्चस्व की लड़ाई छह बार जीत चुके हैं। जब वह कांग्रेस में थे, तब चार बार विधायक बने और जब कांग्रेस छोड़कर वह भाजपा के साथ आए तो लगातार दो बार …
शाहजहांपुर, अमृत विचार। सुरेश कुमार खन्ना भले ही शहर सीट से नौवीं बार विधायक बनकर अजेय चल रहे हों, लेकिन पुवायां विधायक चेतराम भी बर्चस्व की लड़ाई छह बार जीत चुके हैं। जब वह कांग्रेस में थे, तब चार बार विधायक बने और जब कांग्रेस छोड़कर वह भाजपा के साथ आए तो लगातार दो बार से वह रिकॉर्ड जीत दर्ज कर रहे हैं। जनपद की सभी छह सीटों में केवल पुवायां ही ऐसी विधानसभा है, जहां चेतराम ने 2017 और 2022 के चुनाव में सर्वाधिक मत हासिल कर सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का काम किया है।
इसके बावजूद क्षेत्रीय जनता और स्वयं चेतराम का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उन्हें आज तक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी है। उनके समर्थक आस लगाए हैं कि इस बार शायद योगी मंत्रिमंडल में उनके विधायक चेतराम को शामिल कर लिया जाए, ताकि क्षेत्र का समुचित विकास हो सके। आमतौर पर शांत रहने वाले और शालीनता से अपनी बात कहने वाले छोटे कद के बड़े नेता बने चेतराम राजनीति में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।
यहां बता दें कि 1985 के चुनाव में जब सुरेश कुमार खन्ना शहर सीट से चुनाव हार गए थे, तब चेतराम पुवायां सुरक्षित सीट से जीत दर्ज कर चुके थे। तब उन्होंने भाजपा के ही बद्री प्रसाद को पराजित कर जीत का खाता खोला था और अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े चेतराम को 34488 वोट मिले थे और उनके प्रतिद्वंदी भाजपा के बद्री प्रसाद को 22389 वोट प्राप्त हो सके थे। इसी तरह 1989 के चुनाव में चेतराम ने कांग्रेस से ही चुनाव लड़ा और एक बार फिर बद्री प्रसाद को शिकस्त दी। तब बद्री प्रसाद जनता दल के प्रत्याशी थे और उन्हें 31301 वोट हासिल हुए थे, जबकि चेतराम 33081 मत हासिल कर विजयी हुए थे।
वर्ष 1993 के चुनाव में भी चेतराम ने 34354 वोट लेकर जनता दल के रूपराम को पराजित किया था। रूपराम को 31726 वोट मिल सके थे। यह चुनाव भी चेतराम ने कांग्रेस के टिकट पर ही लड़ा था। इसी क्रम में 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में कांगेस के चेतराम का मुकाबला भाजपा के चोखेलाल से हुआ। इसमें भी चेतराम ने 51632 वोट लेकर जीत दर्ज की। चोखेलाल को 47100 मत ही मिल सके थे।
वर्ष 2017 यानि पिछले विधानसभा चुनाव में चेतराम कांग्रेस छोड़ भाजपा से जुड़ गए और इस जुड़ाव को देखते हुए भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। उनका मुकाबला सपा की शकुंतला देवी से हुआ। इस चुनाव में चेतराम ने सर्वाधिक 126635 वोट लेकर रिकॉर्ड बनाया, जबकि शकुंतला देवी को मात्र 54218 वोट ही मिल सके। इस तरह चेतराम ने 72417 मतों से बड़ी जीत दर्ज की।
यह जीत किसी भी विधानसभा चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत साबित हुई। अभी 14 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में भी चेतराम ने सबसे ज्यादा 129785 वोट लेकर अपने ही रिकॉर्ड में सुधार किया। उनके प्रतिद्वंदी सपा के उपेंद्र पाल सिंह मात्र 78207 वोट ही हासिल कर सके। इस चुनाव में चेतराम 51578 वोटों से जीतने में कामयाब हुए। यह उनकी छठी जीत भी है, इसलिए उनकी मंत्री बनने की दावेदारी मजबूत अधिक है।
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