दुर्लभ मानव शरीर ही भगवत प्राप्ति का एकमात्र साधन : धीरशांत
मुरादाबाद, अमृत विचार। शहर के मंडी बास स्थित चूं चूं वाला मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत सत्संग में भजन उपदेशक धीरशांत दास अर्द्धमौनी ने बताया कि इस संसार में मानव योनि पाने के बाद मनुष्य का सबसे प्रथम और अंतिम लक्ष्य भगवान को पाना ही होता है। भगवान को पाने का सबसे सरल साधन भगवान का …
मुरादाबाद, अमृत विचार। शहर के मंडी बास स्थित चूं चूं वाला मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत सत्संग में भजन उपदेशक धीरशांत दास अर्द्धमौनी ने बताया कि इस संसार में मानव योनि पाने के बाद मनुष्य का सबसे प्रथम और अंतिम लक्ष्य भगवान को पाना ही होता है। भगवान को पाने का सबसे सरल साधन भगवान का ध्यान व उनके नाम का जप और भजन ही कहा गया है। गीता में यह भगवान स्वयं कहते हैं।
निरंतर भगवान के ध्यान आदि में लगे हुए हैं और प्रेमपूर्वक भजन करने वाले भक्तों को तत्वज्ञान रूप योग मिलता है, जिससे वह भगवान को ही प्राप्त होते हैं। भगवान बाहर-भीतर सब जगह है। परिपूर्ण है, किंतु अज्ञान के कारण नहीं दीखते। वह अज्ञान भी भगवान के नाम जप के प्रभाव से नष्ट हो जाता है। जब इतने अधम लोग भगवान का नाम लेकर मुक्त हो सकते हैं तो फिर धर्मात्मा की बात ही क्या की जाए, क्योंकि जब द्रौपदी व गजेंद्र के जैसा प्रेम होने पर तो सकाम भजन से भी भगवान मिल सकते हैं, फिर निष्काम भजन से भगवान की प्राप्ति हो जाए।
इसमें तो कहना क्या है, जो मनुष्य हर समय भगवान के नाम का स्मरण करता है उसके तो भगवान अधीन ही हो जाते हैं। मौके पर अर्जुन कुमार अग्रवाल, वीरेंद्र अग्रवाल, बीना जिंदल, नीता अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, डॉ. शचि अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, सोनाली अग्रवाल, रतिका अग्रवाल, प्रिया अग्रवाल, शौर्य अग्रवाल शामिल रहे।
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