लखनऊ: बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था अस्पताल, इलाज के दौरान चली गई मरीज की जान
लखनऊ। राजधानी के जिस मंगलम अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार रात मरीज ने दम तोड़ दिया, असल में वह मंगलम अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा था। अस्पताल के बाहर बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम सिर्फ इसलिए लगे थे,जिससे बेहतर इलाज का झांसा मरीजों को आसानी से दिया जा सके। मरीज भी बड़े-बड़े …
लखनऊ। राजधानी के जिस मंगलम अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार रात मरीज ने दम तोड़ दिया, असल में वह मंगलम अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा था। अस्पताल के बाहर बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम सिर्फ इसलिए लगे थे,जिससे बेहतर इलाज का झांसा मरीजों को आसानी से दिया जा सके। मरीज भी बड़े-बड़े डॉक्टरों का नाम व चमचमाती इमारत देखकर भ्रमित हो जाया करते थे।
यही कारण है कि मंगलम अस्पताल में बेहतर इलाज की मंशा लेकर पहुंचे मरीज शीतला प्रसाद को डॉक्टरों के बड़े नाम वा चमचमाती इमारत की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि मंगलम अस्पताल के कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है। लेकिन जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एक बात पता चली है कि साल 2021 के अप्रैल महीने में मंगलम अस्पताल का रजिस्ट्रेशन समाप्त हो गया था।
अब ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इससे पहले यदि मंगलम अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हुआ था, तो उसके कागजात कहां गए और उसका मालिक कौन है, साथ ही वहां पर कौन-कौन से डॉक्टर मरीजों का इलाज करते थे,इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के पास होनी चाहिए थी,इतना ही नहीं रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद करीब साल भर का समय बीतने को आया और बिना रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के अस्पताल का संचालन होता रहा,मरीजों का इलाज होता रहा और किसी को कानो कान भनक तक न लगी।
स्वास्थ्य विभाग ने भी जहमत उठाना जरूरी ना समझा कि बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों की जानकारी इकट्ठा करें,जब एक शख्स की मौत हो गई तब जाकर पुलिस प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है और अब अधिकारी जांच करने में जुटे हैं। शीतला प्रसाद की मौत होना राजधानी में कोई नया मामला नहीं है, इस तरह के मामले आए दिन निजी अस्पतालों में होते हैं मरीज की मौत होती है और परिजन हंगामा करते हैं, स्वास्थ्य विभाग जांच करता है और मामला फाइलों में दम तोड़ देता है।
दरअसल, बीते रविवार को इंदिरा नगर के चांदन क्षेत्र के रहने वाले 45 वर्षीय शीतला प्रसाद एक सड़क दुर्घटना में चोटिल हो गए थे। उनके एक हाथ में चोट लगी थी, इलाज कराने मंगलम अस्पताल तक वह खुद बाइक चला कर गए थे। बताया जा रहा है कि मंगलम अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने शीतला प्रसाद को देखा और जांच कराने के बाद कहा कि हाथ की हड्डी टूटी है और ऑपरेशन कराना पड़ेगा।
डॉक्टर की सलाह पर शीतला प्रसाद ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए और उन्होंने अपने परिजनों को फोन कर जानकारी दी। रात करीब 9 बजे शीतला प्रसाद का ऑपरेशन शुरू हुआ और 12 बजे उनकी मौत हो गई।
जब इस बारे में स्वास्थ विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ के डी मिश्रा से बात की गई,तो उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी होते ही वह मंगलम अस्पताल स्वयं जांच करने पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल पर ताला लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि अस्पताल संचालक की जानकारी की गई है, उन्हें कागजात के साथ सीएमओ कार्यालय बुलाया गया है, लेकिन वह अभी तक सीएमओ कार्यालय नहीं पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन अप्रैल 2021 को समाप्त हो गया था, लेकिन कोरोना काल की वजह से महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य की तरफ से जारी आदेश के तहत राजधानी के सभी निजी अस्पतालों को 6 महीने रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कराने की छूट दी गई थी,लेकिन 6 महीने से ज्यादा का समय बीत गया,मंगलम अस्पताल की तरफ से कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं भेजे गयी।
यह भी पढ़ें: ईडी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में ओडिशा के पूर्व विधायक की संपत्ति की जब्त
