मौतों को नकारने में जुटा प्रशासन, देवरा भूरा के बाड़े में चार और गोवंशों की गई जान

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संभल/मुरादाबाद/अमृत विचार। देवरा भूरा गांव के बाड़े में कैद पशुओं में से बुधवार को भी चार गोवंश की मौत हुई है। इन चारों पशुओं का शव तत्काल बाड़े में ही जेसीबी से गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। बाड़े में लगातार हो रही पशुओं की मौत से मची खलबली के बाद लगातार दूसरे दिन अधिकारियों ने …

संभल/मुरादाबाद/अमृत विचार। देवरा भूरा गांव के बाड़े में कैद पशुओं में से बुधवार को भी चार गोवंश की मौत हुई है। इन चारों पशुओं का शव तत्काल बाड़े में ही जेसीबी से गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। बाड़े में लगातार हो रही पशुओं की मौत से मची खलबली के बाद लगातार दूसरे दिन अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और तात्कालिक तौर पर चारा पानी की व्यवस्था कराई। हालांकि अधिकारियों ने इस बाड़े में किसी गोवंश की मौत की बात को खारिज किया है। इसी के साथ अब प्रशासन यहां कैद पशुओं को धीरे-धीरे छोड़ने की रणनीति पर काम करने लगा है।

ग्रामीणों ने बताया कि मंगलवार की रात बाड़े में कैद चार पशुओं की मौत हो गई। बुधवार की सुबह आनन फानन में जेसीबी से इन शवों को गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। हालांकि इस दौरान पूर्व विधायक या उनके लोग नजर नहीं आए। उधर, दोपहर में खंड विकास अधिकारी राजीव चौधरी और परियोजना निदेशक मौके पर पहुंचे।

दोनों अधिकारियों ने बाड़ा संचालकों से यहां कैद गोवंश के लिए चारा पानी की व्यवस्था की जानकारी ली और प्रशासनिक स्तर पर इंतजाम करते हुए थोड़ा बहुत हरा चारा और पानी की व्यवस्था कराई। इस दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया, लेकिन दोनों अधिकारी बिना लोगों से मिले वापस लौट गए। बीडीओ राजीव चौधरी ने बताया कि मंगलवार को भी अधिकारी मौके पर गए थे। बुधवार को वह खुद परियोजना निदेशक के साथ गए थे। इस दौरान किसी गोवंश की मौत की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि धीरे धीरे यहां कैद गोवंश को निकालने का भी इंतजाम किया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार सौ से अधिक गोवंश की हुई मौत
ग्रामीणों के मुताबिक मतगणना के अगले दिन से ही यहां गोवंश की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां रोज गोवंशों की मौत हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक इस बाड़े में कैद करीब सौ से अधिक गोवंश की मौत हो चुकी है। इन सभी गोवंश को यहां बाड़े के अंदर ही जेसीबी की मदद से दफनाया गया है। गौरतलब है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री की चुनावी सभा से ठीक पहले तत्कालीन विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू ने अस्थाई तौर पर यह बाड़ा बनवाया था। उसके बाद पूरे विधान सभा क्षेत्र के छुट्टा पशुओं को पकड़कर इसमें कैद कर दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि मतगणना के दिन तक तो यहां कैद पशुओं को चारा पानी मिलता रहा, लेकिन विधायक ने चुनाव हारते ही यहां के इंतजाम से अपना हाथ खींच लिया।

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