बलिया: एक करोड़ की लागत से बने सरकारी अस्पताल में सुविधाओं का अकाल, जनता बेहाल

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Edited By Amrit Vichar
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नगरा/ बलिया। यूपी के बलिया जिले के नगरा कस्बे में जब वर्षों पहले सरकारी अस्पताल बना तो क्षेत्रवासियों में राहत की उम्मीद जगी। लगा कि अब उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही समय व पैसे की बचत होगी लेकिन ऐसा बहुत दिनों तक नहीं चला।अस्पताल के संचालन के बाद से स्थिति दिन-ब-दिन …

नगरा/ बलिया। यूपी के बलिया जिले के नगरा कस्बे में जब वर्षों पहले सरकारी अस्पताल बना तो क्षेत्रवासियों में राहत की उम्मीद जगी। लगा कि अब उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही समय व पैसे की बचत होगी लेकिन ऐसा बहुत दिनों तक नहीं चला।अस्पताल के संचालन के बाद से स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती गई। बात हो रही है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा की।

एक करोड़ की लागत से निर्मित सीएचसी का लोकार्पण वर्ष 2010 में तत्कालीन विधायक सनातन पांडेय ने तत्कालीन डीएम सैंथिल पांडियन सी की उपस्थिति में किया था। आज स्थिति यह है कि यह सीएचसी स्वयं ही कोमा में है। यह अस्पताल दो चिकित्सकों एक महिला व एक पुरुष के सहारे संचालित हो रहा है।

अस्पताल में न तो बाउंड्री है न ही मरीजों व कर्मियों को पीने के लिए स्वच्छ जल ही उपलब्ध है। सबमर्सिबल का मोटर जला हुआ है। बिजली के नाम पर वैधानिक कनेक्शन नहीं है। कटिया से काम चल रहा है। अस्पताल में विद्युत आपूर्ति के लिए आया 250 केवीए का जेनरेटर काफी दिनों से जला पडा है। यहां पर एक्सरे मशीन भी नहीं है। अस्पताल के जंगले व खिडकियों को अराजक तत्वों ने तोड दिया है।

30 बेड की जगह दो-चार बेड ही दिखाई देते हैं। इन बेडों पर चादर भी नसीब नहीं है। सर्जन की तैनाती न होने से आपरेशन थिएटर भी बेकार पडा है। पर्याप्त चिकित्सकों के न होने से मरीजों की संख्या भी नगण्य हो चुकी है। कायाकल्प व स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से नगरा के सीएचसी को जून 2020 में तत्कालीन विधायक धनंजय कन्नौजिया ने गोद लिया था।

अधूरा है चिकित्सकों का आवास-

चिकित्सकों के रहने के लिए निर्मित आधा दर्जन आवास आज भी अधूरे हैं। जंगला-खिडकी तक नहीं लगे हैं। यहां तक कि भवन को कार्यदायी संस्था ने स्वास्थ्य विभाग को हस्तानांतरित तक नहीं किया है।

जल्द होगी चिकित्सकों की तैनाती : अधीक्षक

सीएचसी पर जल्द ही संविदा चिकित्सकों की तैनाती होगी। सुविधाएं बढ़ाने के लिए बार-बार उच्चाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से पत्राचार किया जा रहा है। बजट न मिलने से संसाधन नहीं बढ़ पा रहे हैं। डॉ. संजीव कुमार सिंह प्रभारी अधीक्षक, सीएचसी नगरा…

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