शिक्षा से जुड़ी चुनौती
कोविड-19 ने हमें अपनी शिक्षा प्रणालियों के बारे में सोचने का अवसर दिया। क्योंकि महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली शिक्षा हुई थी। अब यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए यूनेस्को ने कहा है कि संकट कभी भी आ सकता है और सभी देशों की शिक्षा प्रणाली में ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयारी, …
कोविड-19 ने हमें अपनी शिक्षा प्रणालियों के बारे में सोचने का अवसर दिया। क्योंकि महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली शिक्षा हुई थी। अब यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए यूनेस्को ने कहा है कि संकट कभी भी आ सकता है और सभी देशों की शिक्षा प्रणाली में ऐसी आपात स्थितियों के लिए तैयारी, प्रतिक्रिया और उबरने की योजना होनी चाहिएं। शिक्षा प्रणाली में संकट और संवेदनशील स्थितियों से निपटने की नीतियां शामिल होनी चाहिए। यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (जीईएम) रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब यूक्रेन में रूस के भीषण में मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है ।
करीब एक करोड़ 50 लाख से अधिक शरणार्थी यूक्रेन की सीमा पार करके पड़ोसी देशों में जा चुके हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक 2021 में वैश्विक स्तर पर 8.4 करोड़ से अधिक लोगों को जबरन विस्थापित किया गया था। 2022 में, यह आंकड़ा बढ़ना तय है, क्योंकि 15 लाख से अधिक बच्चे पहले ही यूक्रेन से भाग चुके हैं। उधर यूनीसेफ ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से, अभी तक 750 से ज़्यादा स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। संघर्ष ने, बच्चों की एक पूरी पीढ़ी पर गंभीर मनोवैज्ञानिक असर डाला है। जीईएम की यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि शिक्षा प्रणालियों में अक्सर संकट की स्थिति पर कम ध्यान दिया जाता है।
जबकि दुनिया भर में विभिन्न संघर्षों व जलवायु परिवर्तन के चलते आने वाली आपदाओं के कारण होने वाले विस्थापन की वजह से बच्चों की शिक्षा की निरंतरता और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। चाहे शरणार्थी बच्चों के अचानक आगमन-विस्थापन का संदर्भ हो या छात्रों और शिक्षकों की रक्षा करने या जल्दी से दूरस्थ शिक्षा में स्थानांतरित करने का मुद्दा हो। दरअसल वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट (जीईएम रिपोर्ट) एक स्वतंत्र टीम द्वारा तैयार की जाती है और यूनेस्को द्वारा प्रकाशित की गई है। इसका उद्देश्य सभी के लिए शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना है। साथ ही सामने आने वाली चुनौतियों के विश्लेषण के माध्यम से शिक्षा और सहायता नीति को सूचित करना है। ध्यान रहे चुनौतियों के मद्देनजर शिक्षा के भविष्य पर फिर से विचार करना महत्वपूर्ण है।
क्योंकि शिक्षा मनुष्य के विकास की आधारशिला है। कोई भी देश या राज्य शिक्षा के बिना प्रगति नहीं कर सकता। मानवता एवं पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से निपटने और क्षमता हासिल करने के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने की जरूरत है। शिक्षा प्रणालियों में संकट के पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए और शिक्षकों को भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पढ़ाने के लिए तैयार करने की आवश्यकता है।
