राजधानी लखनऊ के अस्पतालों पर बढ़ रही है बाराबंकी के मरीजों की निर्भरता

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बाराबंकी। अगर अचानक आपको हार्ट अटैक पड़ता है तो बाराबंकी में इलाज की उम्मीद मत रखिए। क्योंकि न तो जिला चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ हैं,और न ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही। ऐसी हालत में हृदय रोगियों की निर्भरता राजधानी लखनऊ के अस्पतालों पर बढ़ गई है। बाराबंकी के जिला चिकित्सालय में हृदय रोग …

बाराबंकी। अगर अचानक आपको हार्ट अटैक पड़ता है तो बाराबंकी में इलाज की उम्मीद मत रखिए। क्योंकि न तो जिला चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ हैं,और न ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही। ऐसी हालत में हृदय रोगियों की निर्भरता राजधानी लखनऊ के अस्पतालों पर बढ़ गई है। बाराबंकी के जिला चिकित्सालय में हृदय रोग कक्ष पर विशेषज्ञ न होने के कारण पिछले काफी दिनों से ताला पड़ा हुआ है।

मरीज बड़ी उम्मीद लेकर जिला अस्पताल आता है

छोटी से लेकर गंभीर बीमारियों तक जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, तो मरीज एक लंबी दूरी तय करके जिला मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल की ओर इस उम्मीद से रूख करता है कि उसे यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी। मरीज बड़ी उम्मीद लेकर जिला अस्पताल आता है और उसे जब निराश होकर लौटना पड़ता है तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उस मरीज के मन में एक नकारात्मक भाव उत्पन्न होता है।

व्यवस्था जिला अस्पताल बाराबंकी की है

कुछ इसी तरह की व्यवस्था जिला अस्पताल बाराबंकी की है। जहां मूलभूत सुविधाओं और स्टाफ की कमी से मरीजों को लखनऊ जाना पड़ रहा है। जहां एक ओर जिला चिकित्सालय में डिजिटल एक्स-रे,ब्लडबैक को उच्चीकृत करने डायलिसिस की सुविधा मुहैया कराने को लेकर विभाग फिक्रमंद हैं वहीं हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए एक डॉ. भी नसीब नहीं। 31 दिसम्बर को हृदय रोग विशेषज्ञ डा. संजीव वर्मा के रिटायर हो जाने के बाद से इस विभाग में ताला लटक रहा है ।

रोग से पीड़ित अपनी मां को दिखाने आये संतोष शुक्ला, सत्यप्रेमीनगर, हैदरगढ़ के जरौली निवासी सत्यवती शुक्ला,और कोठी के करूणा शंकर दूबे हृदय रोग का इलाज कराने पहुंचे तो डाक्टर के न होने पर उनके चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा सकती थी । ये तो महज नज़ीर है ऐसे सैंकड़ों मरीजों को जिले के दूर दराज इलाके से हृदय रोग के इलाज के लिए जब जिला चिकित्सालय आकर बिना इलाज के लौटना पड़ता है तो उनके मन में जो वेदना होती है उसे शब्दों में समझा पाना कठिन है चेहरे ही उनके मन की पीड़ा बयां कर देते हैं।

हृदय की जांच के लिए टूडी इको मशीन तो है पर नहीं है टेक्नीशियन

हृदय से जुड़ी बीमारी की जांच के लिए इको मशीन के होते हुये भी टेक्नीशियन के अभाव में मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है ।जिसकी वजह से ये जांच लोगों को अस्पताल से बाहर जाकर कराना पड़ रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी राम जी वर्मा का कहना है कि हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी को पूरी करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।

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