मुरादाबाद : वॉलंटियर्स के दम पर टिकी थैलेसीमिया के 60 मरीजों की जिंदगी
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में सक्रिय थैलेसीमिया के 60 मरीजों की जिंदगी अब ब्लड बैंक के 1200 वॉलंटियर्स के भरोसे पर टिकी है। इन मरीजों को हर महीने एक यूनिट रक्त की जरूरत होती है। चूंकि इनके परिजन भी इनके लिए रक्तदान कर थक चुके हैं। ऐसे में उनकी जिंदगी बचाने के लिए ब्लड बैंक प्रबंधन …
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में सक्रिय थैलेसीमिया के 60 मरीजों की जिंदगी अब ब्लड बैंक के 1200 वॉलंटियर्स के भरोसे पर टिकी है। इन मरीजों को हर महीने एक यूनिट रक्त की जरूरत होती है। चूंकि इनके परिजन भी इनके लिए रक्तदान कर थक चुके हैं। ऐसे में उनकी जिंदगी बचाने के लिए ब्लड बैंक प्रबंधन ने जिले भर में 1200 वॉलेंटियर्स का एक ग्रुप बनाया है। जैसे ही सूचना मिलती है, ये वॉलेंटियर्स मरीज के हक में रक्तदान करने पहुंच जाते हैं।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में थैलेसीमिया के 60 मरीज हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। वैसे भी यह सभी मरीज 20 साल से कम उम्र के हैं। इन मरीजों को हर महीने एक यूनिट रक्त चढ़ाना होता है। नियमानुसार रक्त की व्यवस्था मरीजों के परिजनों को ही करना होता है। चूंकि परिजन भी कम से कम तीन माह में एक बार ही रक्तदान कर सकते हैं। ऐसे में बार बार रक्तदान कर वह भी थक चुके हैं। कई बार ऐसी भी स्थिति बनी है, जिसमें मरीज के लिए रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
बताया कि ऐसे हालात में भरसक प्रयास किया जाता है कि संबंधित ब्लड ग्रुप वाले वॉलेंटियर को बुलाकर रक्तदान कराया जाए। वहीं, जब कोई वॉलेंटियर भी नहीं मिल पाता तो मरीज को ही ब्लड बैंक से थैलेसीमिया कार्ड दिया जाता है। इस कार्ड के आधार पर वह किसी निजी अस्पताल में कुछ सब्सिडी के साथ रक्त हासिल कर सकता है।
अनुवांशिक रोग है थैलेसीमिया
थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें खून में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है। यह रोग ज्यादातर बच्चों को होता है। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने से उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। पीड़ित इस बीमारी की वजह से एनीमिया का शिकार हो जाता है।
थैलेसीमिया के रूप
सामान्य हीमोग्लोबिन में दो शृंखलाएं होती हैं और प्रत्येक शृंखला में अल्फा और बीटा ग्लोबिन होती है, लेकिन थैलेसीमिया के मरीज में अल्फा या बीटा ग्लोबिन की कमी होती है। हीमोग्लोबिन अणु की कौन-सी शृंखला प्रभावित है, उसके आधार पर थैलेसीमिया को वर्गीकृत किया जाता है।
हड्डियों में दर्द
इस बीमारी में रीढ की हड्डी बढ़ने लगती है। इसके चलते शरीर की हड्डियां सामान्य की तुलना में थोड़ी चौड़ी और कमजोर होने लगती हैं। इसके चलते हड्डियों के टूटने या फ्रैक्चर होने की खतरा बढ़ जाता है। हड्डियों में लगातार दर्द भी होता है।
पेशाब में बदलाव
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में रेड ब्लड सेल्स के विघटित होने से उनका पेशाब काफी गाढ़े रंग का होता है।
थैलेसीमिया के मुख्य लक्षण
थकान और कमजोरी
थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन और आयरन की कमी रहती है। इससे शरीर पीला नजर आता है। शरीर में खराब रेड ब्लड सेल्स ऑक्सीजन को ठीक तरह से सोख नहीं पाती है। जिन बच्चों में पैदाइशी यह रक्त विकार होता है, उनमें पहले साल में ही एनीमिया के लक्षण दिखने लगते हैं।
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