डॉ. अर्चना शर्मा के मामले को लेकर सड़क पर उतरे डॉक्टर, जताया विरोध, कहा- समाज को भी हमारा साथ देना चाहिए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले गुरुवार को सैकड़ों डॉक्टरों ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान के दौसा जिले में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने से परेशान होकर उनके द्वारा …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले गुरुवार को सैकड़ों डॉक्टरों ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान के दौसा जिले में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने से परेशान होकर उनके द्वारा खुदकुशी कर लिए जाने से पूरे चिकित्सक समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस घटना की निंदा की है, पुलिस के खिलाफ और डॉक्टर अर्चना व उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपना विरोध जताया है।
आक्रोशित चिकित्सकों ने रिवर बैंक कॉलोनी स्थित आईएमए भवन से शहीद स्मारक तक पैदल मार्च कर अपना विरोध जताया है। पैदल मार्च के दौरान डॉक्टर के हत्यारों को फांसी दो फांसी दो… इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ चिकित्सकों का उत्पीड़न बंद करो की मांग डॉक्टरों ने की है। बताया जा रहा है कि राजस्थान के दौसा जिले में डॉ. अर्चना शर्मा सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट थी, वह असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुकी थी।
उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था लेकिन उन्होंने अपने गांव में जाकर जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थी वहां पर लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देना प्रारंभ किया था, लेकिन एक गंभीर हालत में इलाज के लए पहुंची 22 वर्षीय महिला को इलाज देना डा. अर्चना के गले की फांस बन गया,इलाज के दौरान महिला की मौत हो जाती है,स्थानीय नेताओं के दबाव में पुलिस डॉ. अर्चना के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज कर लेती है,जिससे डॉ. अर्चना क्षुब्ध होकर खुदकुशी कर लेती है, आईएमए इसकी निंदा करता है।
राजधानी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वरिजा दास ने प्रदर्शन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुये बताया कि डॉ. अर्चना शर्मा को एक गंभीर महिला को इलाज देने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब किसी डॉक्टर के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज हुआ, इससे पहले भी इस तरह के मामले दर्ज होते रहे हैं, इस तरह के मामले में सरकार के प्रतिनिधि ही पुलिस पर दबाव बनाते हैं जिसके बाद एफआईआर दर्ज होती है,उन्होंने कहा कि ऐसा कब तक चलेगा,इसका अंत होना जरूरी है नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब सड़क पर गंभीर मरीज इलाज के लिए पड़ा होगा और कोई डॉक्टर देखने को तैयार नहीं होगा ।
आईएमए के प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि राजस्थान के दौसा जिले में डॉ. अर्चना शर्मा सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट थी, वह असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुकी थी, उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था लेकिन उन्होंने अपने गांव में जाकर जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थी वहां पर लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देना प्रारंभ किया था, इस दौरान एक 22 वर्षीय महिला का प्रसव करा रही थी, महिला को इतनी कम उम्र में चार बच्चे हुये थे, इसकी वजह महिला की स्थिति गंभीर थी, प्रसव के दौरान महिला पीपीएच का शिकार हो गयी, जो कि एक गंभीर स्थिति होती है, इसमें गर्भाशय से रक्तश्राव होने लगता है, कई बार इसमें मरीर की मौत भी हो जाती है,इस मामले में चिकित्सक की कोई गलती नहीं थी।
इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ,उन्होंने बताया कि परिजन तरफ से कोई विवाद नहीं था, लेकिन जब वह घर पहुंचते हैं,तो स्थानीय नेता व कुछ दबंगों ने धन उगाही के लिए डॉ अर्चना पर दबाव बनाया,लेकिन वह दबाव में नहीं आती हैं तो उनके खिलाफ पुलिस में 304 का मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। डॉ पर इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने आत्महत्या कर ली,यह खुदकुशी नहीं बल्कि एक प्रकार का मर्डर है और इस घटना के बाद गंभीर मरीजों के इलाज में डाक्टर भय के कारण रुचि नहीं दिखाएगा,जिससे मरीज की जान पर बन आयेगी।
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