किसी भी कानून के तहत नहीं हो सकती बिजली दर में वृद्धि: उपभोक्ता परिषद

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लखनऊ। प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि की चर्चा के बीच उप्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बड़ा दावा करते हुये कहा है कि अगर ऐसा होता है तो यह असंवैधानिक होगा। परिषद का कहना है कि देश के किसी भी कानून के तहत प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की …

लखनऊ। प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि की चर्चा के बीच उप्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बड़ा दावा करते हुये कहा है कि अगर ऐसा होता है तो यह असंवैधानिक होगा। परिषद का कहना है कि देश के किसी भी कानून के तहत प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती क्योंकि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर सरप्लस पैसा निकल रहा है। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से उपभोक्ताओं की जायज मांग का समर्थन करने की अपील करते हुये कहा है कि प्रदेश सरकार बिजली दरों में कमी करा कर जनता को राहत प्रदान करे।

दरअसल, प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर लगभग रुपया 20 हजार 500 करोड़ रुपया सरप्लस निकल रहा है। इस संबंध में उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर रखी है और नियामक आयोग ने उस पर पावर कारपोरेशन से जवाब तलब किया है। जिस पर अभी तक पावर कॉर्पाेरशन ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है।

इसके अलावा पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल एआरआर के मुताबिक 6700 करोड़ रुपये का गैप है। इसी गैप के आधार पर बिजली कंपनियां बिजली दरों में वृद्धि की मांग कर रही है। लेकिन बिजली दर वृद्धि के लिये विद्युत उपभोक्ताओं की बकाये में से बिजली कंपनियों के गैप को घटाया जायेगा। इसमे भी प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का 13 हजार 800 करोड़ रुपया का बकाया बिजली कंपनियों पर निकल रहा है। ऐसे में देश का कोई भी कानून नहीं है जो बिजली दर में वृद्धि की इजाजत देता है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने रविवार को कहा किसी भी बिजली कंपनी या सरकार का यह तर्क की दो वर्ष से बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई है इसलिए वृद्धि होनी चाहिये, यह पूरी तरह असंवैधानिक है। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पर विद्युत उपभोक्ताओं का पैसा बिजली कंपनियों पर सरप्लस निकल रहा है ऐसे में कानून का उल्लंघन करके भले ही बिजली दरों में बढोतरी कराई जाये लेकिन कानूनन बिजली दरों में वृद्धि का कोई भी विकल्प नहीं है।

गौरतलब है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों की तरफ से दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता एआरआर के बाद नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों से टैरिफ का प्रस्ताव 10 दिन के अंदर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद से ही यह आम चर्चा है कि प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि हो सकती है।

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