हल्द्वानी: 10 घंटे तक चला ऑपरेशन, 3 घायल हुए तब जाकर रेस्क्यू हुआ तेंदुआ

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। वन विभाग ने लगातार 10 घंटे से ज्यादा चले ऑपरेशन के बाद धनपुरी गांव के पास आबादी में घुसे तेंदुए को एक घर में बनी गूल से रेस्क्यू किया। वन अधिकारियों के अनुसार, धनपुरी गांव के ग्रामीणों ने सोमवार की सुबह तकरीबन आठ बजे वन विभाग को सूचना दी खेतों में तेंदुआ …

हल्द्वानी, अमृत विचार। वन विभाग ने लगातार 10 घंटे से ज्यादा चले ऑपरेशन के बाद धनपुरी गांव के पास आबादी में घुसे तेंदुए को एक घर में बनी गूल से रेस्क्यू किया।

वन अधिकारियों के अनुसार, धनपुरी गांव के ग्रामीणों ने सोमवार की सुबह तकरीबन आठ बजे वन विभाग को सूचना दी खेतों में तेंदुआ घूम रहा है। सूचना पर भाखड़ा, हल्द्वानी और गदगदिया वन रेंजों से कर्मी तेंदुए को रेस्क्यू करने के लिए मौके पर पहुंच गए। वन विभाग ने पिंजड़ा लगाने के बाद तेंदुए को पकड़ने के लिए हांका शुरू किया।

इस बीच तेंदुए ने वन कर्मचारियों पर हमला कर दिया। हमले में वन कर्मी विपिन चंद्र पलड़िया, हरेंद्र कुमार और होमगार्ड बहादुर रावत घायल हो गए। तेंदुआ दिन भर वन कर्मचारियों का छकाता रहा और टीम के हत्थे नहीं चढ़ा और आंखों से ओझल हो गया। टीम शाम पांच बजे तक तेंदुए को नहीं ढूंढ सकी। गेहूं के खेत में तेंदुए को ढूंढना टेढ़ी खीर साबित हो रहा था।

निराश होकर टीम लौटने लगी तभी स्थानीय काश्तकार महेंद्र मौर्या का माथा ठनका। उन्होंने खेतों के पास में ही बने कन्हैया बुधियाठी के आवास में पानी की गूल में देखा तो उन्हें तेंदुआ का पंजा दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन कर्मचारियों को दी। निराश होकर लौट रही वन टीम लौटकर आई। टीम ने आवास को चारों तरफ से घरे लिया और पिंजड़ा, जाल वगैरह लगा दिया।

फिर पशु चिकित्सकों की टीम ने गूल में फंसे तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया और पिंजड़े में कैद कर लिया। पकड़ा गया तेंदुए की उम्र तकरीबन चार वर्ष है। टीम रेस्क्यू कर रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गई है। जहां उसके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है फिर उसको जंगल में छोड़ा जाएगा।

घायल वन कर्मियों को पहले तेंदुए ने मारा फिर सिस्टम ने 
तेंदुए के हमले में वनदरोगा विपिन चंद्र पलड़िया और वन आरक्षी हरेंद्र कुमार घायल हो गए। उनके पैर और हाथ पर तेंदुए ने पंजे और दांत से हमला कर लहूलुहान किया था। जब वन कर्मी सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों ने एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने का हवाला देते हुए इलाज करने से मना कर दिया। फिर हंगामा हुआ तो घायल कर्मचारियों की ड्रेसिंग और टिटनेस इंजेक्शन लगाए। फिर भी एंटी रैबीज इंजेक्श नहीं लगाया। घायल वन कर्मी एक-दो घंटे तक एसटीएम में घूमते रहे। बाद में मामला प्राचार्य डॉ.अरुण जोशी तक पहुंचा फिर लोकल परचेज कर कर्मचारियों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए।

ड्रोन में दिखाई दिया तेंदुआ
सोमवार की सुबह खेतों में तेंदुए होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। इस बीच एक युवक ने ड्रोन उड़ाया तो तेंदुआ खेत में चलता दिखाई दिया। इसको लेकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई। लोग घरों में दुबक गए।

धनपुरी में आबादी के बीच में घुसे तेंदुए को देर शाम रेस्क्यू कर लिया गया है। उसको रानीबाग रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया है। जहां उसके स्वास्थ्य की निगरानी के बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा।
दीपचंद्र आर्य, वन संरक्षक, पश्चिमी वन वृत्त

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