राम के जीवन से सीखिए न होगा कानून का उल्लंघन और नहीं देंगे किसी को दोष: चंपत राय
लखनऊ। आज सब यही जानते हैं कि राम को कैकेयी के कारण 14 वर्ष का वनवास मिला, लेकिन राम के मुख से अपनी माता कैकेयी की आलोचना कहीं पर भी नहीं की गई, कहीं पर किसी भी कथा में कैकेयी के आलोचना की बात राम के मुख से सुनाई नहीं पड़ती, ऐसे हैं राम, आजकल …
लखनऊ। आज सब यही जानते हैं कि राम को कैकेयी के कारण 14 वर्ष का वनवास मिला, लेकिन राम के मुख से अपनी माता कैकेयी की आलोचना कहीं पर भी नहीं की गई, कहीं पर किसी भी कथा में कैकेयी के आलोचना की बात राम के मुख से सुनाई नहीं पड़ती, ऐसे हैं राम, आजकल तो लोग छोटी-छोटी बातों पर दूसरों को दोष देते हैं, राम के जीवन से हमें सीखना चाहिए। राम ने किसी को दोष नहीं दिया, यह कहना है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चंपत राय का। उन्होंने यह बातें राम नवमी की पूर्व संध्या पर गन्ना संस्थान में आयोजित श्री राम जन्मोत्सव कार्यक्रम में कही।
वनवास के नियमों का उल्लंघन नहीं किया
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चंपत राय ने कहा कि सेल्फ डिसीप्लिन के मामले में राम से बड़ा उदाहरण कोई और नहीं है,राम जंगल में थे, वहां पर उन्हें कोई नहीं देख रहा था। उसके बाद भी उन्होंने वनवास के नियमों का उल्लंघन नहीं किया, उन्होंने जंगल में रहकर वनवास के नियमों का पालन किया। आजकल लोग ट्रैफिक सिग्नल पर यदि कोई ना रोके, तो चुपचाप सिग्नल तोड़ कर निकल जाते हैं।

उन्होंने कहा कि राम चार भाई थे, साथ पैदा हुए,खेले- कूदे,खाए पिए, लेकिन जब राम को राजा बनाया जाने लगा तब उन्होंने यह सवाल किया कि राजा मैं अकेले क्यों बनू।
राम को जब वनवास जाने के लिए कहा गया, तो वह सहर्ष तैयार हो गए, एक रात में पूरा दृश्य बदल गया। उसके बाद भी राम शांत रहे। राम का ऐसा आचरण राम की यह गाथा,आज के दौर में हमारे संस्कारों में है क्या, यह सवाल चंपत राय ने कार्यक्रम के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों से पूछा।
उन्होंने कहा कि राम के इस पहलू को माता पिता अपने बच्चों को बता सकते हैं, क्या आज के दौर में उनमें यह साहस है।
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