बरेली: नगर आयुक्त समेत अन्य अधिकारियों पर रिश्वत लेने का आरोप, कोर्ट में परिवाद दर्ज

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बरेली,अमृत विचार। नगर निगम के अधिकारियों पर भूमाफिया से रिश्वत लेकर मिशन कम्पाउंड स्थित दुकानों को कब्जाने का आरोप लगाया गया है। प्रकरण में स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट-1 ने अर्जी पर बतौर परिवाद दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है। किला फूलबाग निवासी डा. अनुपमा राघव ने नगर आयुक्त अभिषेक आनन्द, अपर नगर …

बरेली,अमृत विचार। नगर निगम के अधिकारियों पर भूमाफिया से रिश्वत लेकर मिशन कम्पाउंड स्थित दुकानों को कब्जाने का आरोप लगाया गया है। प्रकरण में स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट-1 ने अर्जी पर बतौर परिवाद दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है। किला फूलबाग निवासी डा. अनुपमा राघव ने नगर आयुक्त अभिषेक आनन्द, अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह व सहायक लेखाधिकारी प्रभारी राजस्व हृदय प्रकाश के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने को स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट-1 के समक्ष अर्जी दी थी, जिसको कोर्ट ने बतौर परिवाद स्वीकार कर लिया।

केस में वादिनी ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराते हुए कहा कि 6 जून 1995 को नगर निगम के तत्कालीन प्रशासक द्वारा मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के एवज में मिशन मार्केट में उनको तीन दुकानों का आवंटन किया गया था। कब्जा 2001 में कोर्ट के आदेश पर मिला था। वर्ष 2004 में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

जिसकी शिकायत महिला आयोग, शासन के आला अधिकारियों से करने पर नगर निगम ने पुनः दुकानों का निर्माण करवाया और 2011 में कब्जा दिया गया। जांच में तत्कालीन जांच अधिकारी आईएएस अनीता चटर्जी ने भी स्पष्ट रूप से अंकित किया कि दुकानों के पीछे मिशन कम्पाउंड की भूमि को बिल्डर ने खरीद लिया है।

वादिनी ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त अभिषेक आनन्द की नियुक्ति के समय से ही सचिन भारद्वाज व नगर निगम द्वारा ब्लैक लिस्ट की गयी विज्ञापन कम्पनी के संचालकों में हरीश अरोड़ा आदि लोग शामिल हैं, दोबारा उनकी दुकानों को हासिल करने के प्रयास में लग गये। आरोप है कि अभिषेक आनंद ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिल्डरों से दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर उनका आवंटन निरस्त कर दुकानें पांच दिन में खाली करने अन्यथा कब्जा हटवाने का नोटिस जारी कर दिया।

उपरोक्त अधिकारियों ने विपक्षीगणों से मिलकर फर्जी साक्ष्य बनाकर अपराध किया है। 22 अक्टूबर 2020 को नगर निगम अधिकारियों ने वादिनी को बुलाकर 10 लाख रुपये देने का दबाव बनाया, अन्यथा दुकानें तोड़ डालने की बात कही। वहां मौजूद अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह व सहायक लेखाधिकारी राजस्व हृदय प्रकाश ने भी कहा कि तुमको नोटिस दे चुके हैं तुम्हारी दुकानें तोड़ देंगे।

इंकार करने पर जमा की गयी सिक्योरिटी रकम को फर्जी तरीके से किराये में समायोजित कर दिया। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में भी विपक्षीगण जवाब दाखिल करने से कतरा रहे हैं। हाईकोर्ट में नगर निगम के पैनल के अधिवक्ता के बजाए सीनियर काउंसिल को व्यक्तिगत तौर पर केस में दाखिल किया गया है। कोर्ट ने वादिनी के बयान दर्ज करने के बाद गवाह के बयान दर्ज कराए जाने को 22 अप्रैल की तिथि नियत की है।

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