ग्राम स्वराज
भारत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण भारत है। राष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांवों में पंचायत स्तर पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। पंचायतों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। यानी पंचायतों का समग्र विकास करके ही सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त किया जा …
भारत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण भारत है। राष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांवों में पंचायत स्तर पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। पंचायतों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। यानी पंचायतों का समग्र विकास करके ही सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
पंचायती राज संस्थानों की प्रशासन क्षमताओं को विकसित करने के लिए बुधवार को केंद्र प्रायोजित योजना राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई है। 5,911 करोड़ रुपये की इस योजना को आगे बढ़ाए जाने के फैसले को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई।
उम्मीद है कि इस निर्णय से 2.78 लाख ग्रामीण स्थानीय निकायों को सतत विकास लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपनी-अपनी भूमिकाओं के लिए स्वीकृत गतिविधियों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करेंगी। राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं और आवश्यकता के अनुसार केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त करने के लिए अपनी वार्षिक कार्य योजना तैयार करेगी।
यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों तक विस्तारित होगी और भिन्न क्षेत्रों के ग्रामीण स्थानीय शासन की संस्थाएं भी शामिल होंगी, जहां पंचायतें मौजूद नहीं हैं। पंचायतें जमीनी स्तर पर नेताओं, योजनाकारों और नीति निर्माताओं के रूप में उभरी हैं। स्थानीय शासन में लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाने में ग्राम सभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पंचायतों को 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर ध्यान केंद्रित करके एकीकृत ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, इन लक्ष्यों को गरीबी मुक्त, स्वच्छ, स्वस्थ, बच्चों के अनुकूल और सामाजिक रूप से सुरक्षित, सुशासित गांव सुनिश्चित करने के लिए नौ विषयों के तहत शामिल किया गया है। देश में ग्रामीण स्थानीय निकायों के निर्वाचित 31.65 लाख प्रतिनिधियों में से 46 प्रतिशत महिलाएं भी हैं।
वर्तमान में सतत विकास लक्ष्य की परिकल्पना में आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय सुरक्षा, राजनीतिक सुरक्षा शामिल हैं। आर्थिक समृद्धि व सामाजिक न्याय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा इन दोनों के मध्य निर्भरता भी विद्यमान है। बिना आर्थिक समृद्धि के सामाजिक न्याय नहीं हो सकता, किंतु बिना सामाजिक न्याय के आर्थिक समृद्धि निरर्थक है।
कहा जा सकता है कि पंचायतों के व्यापक विकास को सुनिश्चित करने और विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी योजनाओं और कार्यक्रमों में जन भागीदारी बढ़ानी होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया विश्वास पैदा करने का मौका मिलेगा।
