हल्द्वानी: गेहूं बेचने नहीं केवल रेट जानने पहुंच रहे किसान
हल्द्वानी, अमृत विचार। इस बार आरएफसी का गेहूं खरीद लक्ष्य काफी ज्यादा पिछड़ सकता है। पिछले 27 दिनों में एक भी किसान ने मंडी आरएफसी के कांटे पर गेहूं नहीं तुलवाया। किसान पहुंच तो रहे हैं, लेकिन सिर्फ रेट जानने और फिर बाजार में व्यापारियों को अपनी फसल बेच रहे हैं। एक अप्रैल से गेहूं खरीद …
हल्द्वानी, अमृत विचार। इस बार आरएफसी का गेहूं खरीद लक्ष्य काफी ज्यादा पिछड़ सकता है। पिछले 27 दिनों में एक भी किसान ने मंडी आरएफसी के कांटे पर गेहूं नहीं तुलवाया। किसान पहुंच तो रहे हैं, लेकिन सिर्फ रेट जानने और फिर बाजार में व्यापारियों को अपनी फसल बेच रहे हैं।
एक अप्रैल से गेहूं खरीद के लिए आरएफसी द्वारा मंडी में भी कांटा लगा दिया गया था। पिछली बार करीब डेढ़ दर्जन के करीब किसानों ने आरएफसी के कांटे पर 1980 कुंतल गेहूं तुलाई की थी। इस बार एक भी किसान ने गेहूं नहीं आरएफसी को नहीं बेचा। अधिकारी भी इसका कारण किसान को बाजार में गेहूं की ज्यादा कीमत मिलना मान रहे हैं। उनका कहना है कि किसान एमएसपी रेट और स्कीम की जानकारी लेने तो आते हैं, लेकिन गेहूं किसी ने नहीं बेचा।
क्यों है यह स्थिति
कारण – 1
-इस बार एमएसपी रेट (समर्थन मूल्य) 2015 है। जबकि किसानों को बाजार में 2100 रुपये प्रति कुंतल मिल जा रहे हैं।
कारण – 2
-वर्ष 2021-22 में एमएसपी रेट 1975 रुपये प्रति कुंतल के अलावा 20 रुपये बोनस भी था। इस बार कोई बोनस की घोषणा नहीं की गई।
कारण – 3
-किसान अपनी फसल को बेचने के बाद उसकी कीमत को फौरन प्राप्त करना चाहता है। लेकिन आरएफसी से इसके लिए समय लगता है।
इस बार बाजार में किसानों को एमएसपी से ज्यादा दाम मिल रहे हैं। इसलिए किसान आ तो रहे हैं, लेकिन केवल रेट को जानने और फिर चले जा रहे हैं। अभी तक एक भी किसान ने गेहूं नहीं बेचा है।
कृष्ण कुमार, वरिष्ठ विपणन अधिकारी
बाजार रेट से एमएसपी रेट कम है और इस बार बोनस भी घोषित नहीं किया गया है। इसके अलावा गेहूं बेचने के बाद पैसा मिलने में भी देरी होती है। इसलिए किसान अपनी सुविधा से गेहूं बेच रहा है।
-नीरज रैकवाल, किसान गौलापार
