बरेली: कैसे संवरे बच्चों का भविष्य, शिक्षकों की कमी बनी रोड़ा
बरेली, अमृत विचार। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के सरकारी दावे दम तोड़ रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से स्कूली शिक्षा का ढांचा चरमराता दिख रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी पढ़ाई की राह में रोड़ा साबित हो रही है। कई स्कूल लंबे समय से एक-एक शिक्षक के सहारे चल …
बरेली, अमृत विचार। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के सरकारी दावे दम तोड़ रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से स्कूली शिक्षा का ढांचा चरमराता दिख रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी पढ़ाई की राह में रोड़ा साबित हो रही है। कई स्कूल लंबे समय से एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
इससे विद्यालयों में बच्चों का नामांकन लगातार घट रहा है। बच्चों के अनुपात के अनुसार स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए, मगर यहां शिक्षकों की कमी के कारण मानकों का पालन नहीं हो रहा है। इससे शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है।
15 हजार बच्चे, 109 स्कूल और शिक्षक सिर्फ 150
नगर क्षेत्र के लगभग 80 फीसद स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। नगर में कुल 109 प्राथमिक, जूनियर और कंपोजिट स्कूल हैं। 36 कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। कई स्कूल तो ऐसे हैं जो सरकारी मानकों के विपरीत चल रहे हैं। सैकड़ों बच्चों के पंजीकृत होने के बावजूद भी सिर्फ एक या दो शिक्षकों द्वारा वहां शिक्षण कार्य किया जा रहा है।
रहपुरा चौधरी के प्राथमिक स्कूल में करीब 200 बच्चे हैं। यहां सिर्फ एक शिक्षिका तैनात है। कटघर के प्राथमिक स्कूल में भी 90 बच्चे हैं, पूरे स्कूल की जिम्मेदारी एक शिक्षामित्र के कंधों पर है। टियुलिया के कंपोजिट स्कूल में 200 बच्चे हैं। यहां सिर्फ दो शिक्षक तैनात हैं। कुंवरपुर का प्राथमिक स्कूल, सहसवानी टोला, बिहार कला और मॉडल टाउन स्थित स्कूल का भी कमोबेश यही हाल है। इनमें भी कई ऐसे स्कूल हैं जहां किसी प्रभारी या सहायक अध्यापक की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। मानकों के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में 30 बच्चों पर कम से कम एक शिक्षक और जूनियर के स्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए।
शिक्षकों की कमी को लेकर कई बार शासन को पत्र लिखकर नियुक्ति कराने की मांग की गई है। इसके अलावा स्कूलों में तैनात शिक्षकों और शिक्षामित्रों को जरूरत पड़ने पर दूसरे विद्यालयों में लगाया जा रहा है। शिक्षकों की तैनाती के संबंध में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं—विनय कुमार, बीएसए।
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