हल्द्वानी: मई दिवस पर हल्लाबोल, बोले वक्ता- “मोदी सरकार चला रही भाईचारे, घरबार और संविधान पर बुलडोजर”… देखें VIDEO
हल्द्वानी, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर ‘मई दिवस संयुक्त आयोजन समिति’ की ओर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में सभा की गई और सभा के बाद एसडीएम कार्यालय तक जुलूस निकालकर मजदूर अधिकारों को बुलंद किया गया। देखें वीडियो: मई दिवस पर हल्लाबोल, बोले वक्ता- फासीवाद के खिलाफ एकजुट हों सभी मई दिवस के …
हल्द्वानी, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर ‘मई दिवस संयुक्त आयोजन समिति’ की ओर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में सभा की गई और सभा के बाद एसडीएम कार्यालय तक जुलूस निकालकर मजदूर अधिकारों को बुलंद किया गया।
देखें वीडियो: मई दिवस पर हल्लाबोल, बोले वक्ता- फासीवाद के खिलाफ एकजुट हों सभी
मई दिवस के संघर्ष के इतिहास पर वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों ने 1886 में आत्मबलिदानी संघर्ष के जरिए आठ घंटे काम का दिन का अधिकार हासिल करने के लिए पहली बड़ी हड़ताल संगठित की थी। तब पूंजीपति अपने यहां कार्यरत मजदूरों से 12 से लेकर 16 घण्टे तक काम लेकर उनका भारी शोषण करते थे। इस ऐतिहासिक हड़ताल का वहां की पूंजीवादी सरकार ने भारी दमन किया। 3 और 4 मई को हड़ताली मजदूरों पर गोलियां चलाई गई। 6 मजदूर इस गोलीकांड में शहीद हुए तथा 200 से ज्यादा मजदूर घायल हुए। 1886 की इस ऐतिहासिक हड़ताल के दौरान शिकागो के मजदूर शहीदों के बहे खून से भीगा उनके बदन का कपड़ा बाद में लाल झंडे के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर आंदोलन का परचम बन गया।
इस ऐतिहासिक हड़ताल और उसके शहीदों की याद को बनाए रखने और उनके द्वारा शुरू किए गए संघर्ष की मशाल को जलाए रखने के लिए ही एक मई को पूरी दुनिया की मजदूर पार्टियों व संगठनों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस” मनाया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज के हालत 1886 से कम बदतर नहीं है। इन 136 वर्षों में दुनिया के मजदूरों ने अपने ऐतिहासिक संघर्ष और भारी कुर्बानियों के बल पर 8 घंटे की ड्यूटी, न्यूनतम वेतन कानून, सामाजिक सुरक्षा जैसे तमाम श्रम अधिकार हासिल किए थे, आज की पूंजीपति परस्त सरकारें उन अधिकारों को खत्म करने पर लगी हैं। भारत में भी 44 श्रम कानूनों को खत्म कर नरेंद्र मोदी सरकार ने चार श्रम कोड में तब्दील कर दिया है। इसके जरिये 8 घण्टे की ड्यूटी, न्यूनतम वेतन कानून जैसे तमाम श्रम अधिकारों को खत्म कर पूंजीपतियों को मजदूरों के खुले शोषण की छूट दे दी है। सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र का लगातार निजीकरण किया जा रहा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि वर्तमान में देश में काबिज मोदी सरकार ने भाईचारे , घरबार और संविधान पर बुलडोजर चला रही है। उन्होंने कहा कि अरबपतियों- खरबपतियों ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपने शिकंजे में जकड़ लिया है। भारत के संसाधनों पर भी चंद कारपोरेट कंपनियों और चंद बहुराष्ट्रीय निगमों का शिकंजा कसता जा रहा है। उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण के नतीजे सामने हैं। उद्योग-धंधे चौपट हो रहे हैं। बैंक दीवालिया हो रहे हैं। रेल, प्रतिरक्षा, बैंक, बीमा, कोयला जैसे बुनियादी व संवेदनशील विभागों तक को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। अब सेना में सैनिकों की भी मात्र तीन वर्ष के लिए कांट्रेक्ट भर्ती की तैयारी की जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान कॉरपोरट फासीवादी राज नहीं चलेगा ! , शिकागो के शहीद अमर रहें! मई दिवस अमर रहे! इंकलाब जिंदाबाद! मजदूर विरोधी श्रम कोड वापस लो! के नारे लगाए गए।
मई दिवस कार्यक्रम सभा व जुलूस में ऐक्टू , क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, देवभूमि उत्तराखंड सफ़ाई कर्मचारी संघ, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भोजनमाता संगठन, बीमा कर्मचारी संघ, सनसेरा श्रमिक संगठन, पछास, आइसा, किसान महासभा, भाकपा (माले), पंजाब बेवल्स ग्रियर्स वर्कर्स यूनियन, जनवादी लोक मंच, महिन्द्रा कर्मकार यूनियन लालपुर, रोडवेज संयुक्त परिषद आदि संगठनों व यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जिनमें मुख्य रूप से केके बोरा, राहत मसीह, राजा बहुगुणा, मोहन मटियाली, डॉ कैलाश पांडेय, जोगेंद्र लाल, विमला रौथाण, रजनी जोशी, एन पी जोशी, के एन भट्ट, महेन्द्र जीना, मुकेश भंडारी, बहादुर सिंह जंगी, आर सी त्रिपाठी, जगीर सिंह, यतीश पंत, मोहन सिंह बिष्ट, दीपक कांडपाल, उर्व दत्त मिश्रा, ललित मटियाली, धीरज कुमार, चंदन, हरीश पांडे, नैन सिंह कोरंगा, प्रमोद कुमार, कमल जोशी, टी आर पांडे, शिव सिंह, आनंद पांडे, रोहित टांक, राजेन्द्र, हिमांशु चौधरी, कंचन, हेमंत कुमार, मोहन सिंह अधिकारी, संजय चंद, अशोक कश्यप, राजीव पंत, मनोज आर्य, धन सिंह, रजनीश चौहान, नरेंद्र बनी, रवीन्द्र पाल, कांता प्रसाद, नवज्योत सिंह परिहार, भरत, परशुराम, ललित जोशी, प्रकाश, नवीन, प्रशांत, हीरा, प्रेम बिष्ट आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रजनी जोशी व जोगेंदर लाल ने संयुक्त रूप से किया।
