पहली आरआरटीएस ट्रेन शनिवार को एनसीआरटीसी को सौंपी जाएगी

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नई दिल्ली। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’ (आरआरटीएस) की पहली ट्रेन शनिवार को गुजरात के सावली में एक समारोह में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को सौंपी जाएगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। एनसीआरटीसी भारत का पहला आरआरटीएस स्थापित कर रहा है जो एक रेल-आधारित, उच्च गति, उच्च आवृत्ति क्षेत्रीय यात्री …

नई दिल्ली। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’ (आरआरटीएस) की पहली ट्रेन शनिवार को गुजरात के सावली में एक समारोह में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को सौंपी जाएगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। एनसीआरटीसी भारत का पहला आरआरटीएस स्थापित कर रहा है जो एक रेल-आधारित, उच्च गति, उच्च आवृत्ति क्षेत्रीय यात्री पारगमन प्रणाली है।

पहली ट्रेन सराय काले खां-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर चलाई जाएगी। बयान के अनुसार, आरआरटीएस ट्रेन का 100 प्रतिशत निर्माण भारत में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत गुजरात के सावली में एल्सटॉम (पूर्व में बॉम्बार्डियर) कारखाने में किया जा रहा है। एल्सटॉम एक फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसने पिछले साल की शुरुआत में बॉम्बार्डियर ट्रांसपोर्टेशन का अधिग्रहण किया था। कनाडाई-जर्मन कंपनी बॉम्बार्डियर ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के लिए मेट्रो कार का निर्माण किया था।

एनसीआरटीसी द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘‘इसे 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने के लिए डिजाइन किया गया है। ये 160 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति के साथ भारत में सबसे तेज ट्रेनें होंगी।’’ ट्रेनों के आने के बाद इस साल के अंत तक प्राथमिकता वाले खंड (साहिबाबाद-दुहाई) पर प्रायोगिक आधार पर प्रारंभिक परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है। 17 किलोमीटर के प्राथमिकता वाले खंड को 2023 तक और पूर्ण गलियारे को 2025 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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