World Thalassemia Day 2022: गर्भधारण से पूर्व कराएं थैलेसीमिया की जांच, बीमारी से पाएं निजात
बहराइच। जन्म जात बीमारियों में से एक प्रमुख बीमारी थैलेसीमिया है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जो माता- पिता दोनों में से किसी एक से बच्चे को हो सकती है। वहीं मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को छः माह से दो वर्ष की आयु के बीच में खून की मात्रा में भारी कमी हो जाती …
बहराइच। जन्म जात बीमारियों में से एक प्रमुख बीमारी थैलेसीमिया है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जो माता- पिता दोनों में से किसी एक से बच्चे को हो सकती है। वहीं मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को छः माह से दो वर्ष की आयु के बीच में खून की मात्रा में भारी कमी हो जाती है तथा उचित उपचार न होने पर कुछ वर्षों में उनकी मृत्यु हो जाती है। इस बीमारी से बचाव के तरीके व इलाज के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 8 मई को अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।
इस मामले के जानकार व गैर संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ अजीत चंद्रा का कहना है कि थैलेसीमिया तीन प्रकार का होता है –मेजर, माइनर और इंटरमीडिएट थैलेसीमिया। संक्रमित बच्चे के माता और पिता दोनों के जींस में थैलेसीमिया है तो मेजर, यदि माता-पिता दोनों में से किसी एक के जींस में थैलेसीमिया है तो माइनर व जिनमें मेजर और माइनर दोनों के लक्षण हों उनमें इंटरमीडिएट थैलेसीमिया होता है। उन्होने बताया भारत में 100 में तीन व्यक्ति थैलेसीमिया रोग के वाहक होते हैं । यानि उन्हे स्वयं को रोग नहीं होता परंतु उनके बच्चों में मेजर थैलेसीमिया नामक रक्त संबंधी गंभीर रोग प्रकट हो सकता है ।

निःशुल्क उपलब्ध है जांच की सुविधा-
जिला स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि थैलेसीमिया की जांच के लिए गर्भस्थ शिशु की जांच एक अत्याधुनिक जांच है और यह सुविधा पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ संजय गांधी पी0जी0आई0 लखनऊ में उपलब्ध है । हालांकि रक्त का नमूना जनपद बहराइच में जिला महिला अस्पताल के पैथालोजी विभाग में या जनपद में कार्यरत एसजीपीजीआई के थैलेसीमिया मैनेजर से मिलकर या मोबाइल नंबर 7905801741 पर संपर्क कर थैलेसीमिया की निःशुल्क जांच कराई जा सकती है। यह सुविधा सिर्फ बहराइच व श्रावस्ती जनपद में उपलब्ध है।
गर्भधारण से पूर्व माता-पिता कराएं जांच –
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने बताया कि आनुवांशिक बीमारियाँ माता या पिता या दोनों से बच्चे को मिल सकती हैं। हालांकि इसमें उनका कोई दोष नहीं होता। इसके लिए सभी गर्भवती महिला अथवा गर्भ धारण करने से पूर्व सभी माता-पिता की जांच कर बीमारी का पता लगाया जा सकता है। साथ ही जिनके परिवार में आनुवांशिक दोष का इतिहास रहा हो उन्हे परिवार बनाने से पहले जांच अवश्य करानी चाहिए ताकि होने वाले शिशु को मेजर थैलेसीमिया से बचाया जा सके ।
रोग से बचने के उपाय –
जन्म के 24 घंटे के बाद खून की जांच से रोग की पहचान करना
शादी से पहले लड़के व लड़की के खून की जांच कराना
नजदीकी रिश्ते में विवाह करने से बचना
गर्भधारण से 4 महीने के अन्दर भ्रूण की जाँच कराना
पढ़ें-बहराइच: मगरमच्छ के हमले के 10 घंटे बाद क्षत विक्षत बरामद हुआ बालक का शव
