मुरादाबाद : साठ की उम्र में टूटा 34 वर्ष का प्यार, पति ने कहा- कयामत तक करूंगा इंतजार
मुरादाबाद, अमृत विचार। रिश्तों की नाजुक डोर को कब कौन सी चोट तोड़ दे, कोई ठिकाना नहीं। सात जन्मों का बंधन बुधवार को जब एक झटके में टूटा, तो नारी उत्थान केंद्र पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पति से मुंह मोड़ कर लौट रही महिला को मनाने की पुरजोर कोशिश हुई। …
मुरादाबाद, अमृत विचार। रिश्तों की नाजुक डोर को कब कौन सी चोट तोड़ दे, कोई ठिकाना नहीं। सात जन्मों का बंधन बुधवार को जब एक झटके में टूटा, तो नारी उत्थान केंद्र पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पति से मुंह मोड़ कर लौट रही महिला को मनाने की पुरजोर कोशिश हुई। मन मस्तिष्क व दिल पर लगी चोट ने पलटने की बजाय महिला को आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया। साठ साल की उम्र में 34 वर्ष का रिश्ता टूटने की घटना ने हर किसी को झकझोर दिया।
महानगर में मझोला थाना क्षेत्र के लाइनपार कांशीराम नगर में रहने वाली बब्बो ने 34 वर्ष पहले जीवन की राह पर राशिद संग चलने का फैसला किया। निकाह बाद दंपती छह बच्चों के मां-बाप बने। बड़े बेटे की मौत भी हो चुकी है। अन्य बच्चे शादीशुदा हैं। बुधवार को पुलिस की चौखट पर पहुंची बब्बो ने तहरीर देकर बताया कि पति की प्रताड़ना से वह त्रस्त है। बेरोजगार पति उसकी पिटाई करता है। जबकि घरों में झाड़ू पोछा कर के वह अपने बच्चों व परिवार का पेट पालती रही। वक्त के साथ पति के सुधरने की उम्मीद ने दोनों को 34 साल तक साथ रखा।
अब दिल र टूट चुका है। पति सुधरने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में पति संग रहना मुमकिन नहीं है। पति से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है। पति से रिश्ता तोड़ना चाहती है। रिश्ते की नाजुक डोर बची रही, इस उम्मीद में पुलिस ने मामला नारी उत्थान केंद्र भेज दिया। वहां काउंसलर रीतू नारंग ने दंपती से बातचीत की। दो घंटे तक दोनों को समझाया। बच्चों व पोते पोतियों का हवाला दिया। फिर भी बब्बो खुद के फैसले से टस से मस नहीं हुई। महिला ने दो टूक कहा कि हरहाल में वह पति से अलग रहेगी। मां को मनाने की बच्चों की कोशिश भी परवान नहीं चढ़ी।
बब्बो ने कहा कि बेटों ने यदि सम्मान किया तो उनके साथ रहूंगी, लेकिन शर्त सिर्फ एक कि पति के बगैर। बब्बो के कठोर निर्णय ने सभी को झकझोर दिया। अंतत: रिश्ता तोड़ने पर दंपती में सहमति बनी। बब्बो के पांव जब नारी उत्थान केंद्र के मुख्यद्वार के तरफ बढ़े, तो पति व बच्चों की आखें नम थीं। कातर नजरों से बब्बो को दूर जाते देख राशिद फफक पड़ा। रूंधे गले से कहा कि बब्बो मरते दम तक मैं तुम्हारे लौटने का इंतजार करूंगा। फिर भी बब्बो के कदम नहीं रुके। उधर राशिद अपने बच्चों से लिपट कर रोता रहा।
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