बरेली: शासन के अधिवक्ता विरोधी पत्रों से आक्रोशित वकील विरोध दिवस मनाएंगे

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बरेली, अमृत विचार। शासन द्वारा जारी अधिवक्ता विरोधी पत्रों को लेकर गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ यूपी की आपात वर्चुअल बैठक बुलाई गई, जो काउंसिल चेयरमैन शिरीष कुमार मेहरोत्रा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए सदस्य-सचिव अजय कुमार शुक्ला ने पत्र जारी कर अवगत कराया कि अधिवक्ता ऑफिसर ऑफ …

बरेली, अमृत विचार। शासन द्वारा जारी अधिवक्ता विरोधी पत्रों को लेकर गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ यूपी की आपात वर्चुअल बैठक बुलाई गई, जो काउंसिल चेयरमैन शिरीष कुमार मेहरोत्रा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए सदस्य-सचिव अजय कुमार शुक्ला ने पत्र जारी कर अवगत कराया कि अधिवक्ता ऑफिसर ऑफ द कोर्ट होता है। यह अधिकार संविधान ने उन्हें प्रदान किया है।

अधिवक्ताओं के विरुद्ध बदले की भावना से 14 मई को विशेष सचिव प्रफुल्ल कमल द्वारा पत्र जारी कर अधिवक्ताओं को अराजक तत्व बताना एवं उनके खिलाफ एकतरफा एवं क्षेत्राधिकारहीन अनुशासनात्मक कार्रवाई किये जाने से प्रदेश के अधिवक्ताओं में रोष है। हालांकि अधिवक्ताओं के दबाव में शासन को इस पत्र को अगले ही दिन वापस लेना पड़ा था, जो अधिवक्ताओं की आंशिक विजय एवं एकता को दर्शाता है, लेकिन अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी का पत्र 15 मई को पुनः जारी हुआ है, जोकि न्याय के शासन एवं अधिवक्ता सम्मान पर कुठाराघात करता है।

पत्र में उल्लेखित ब्यौरे की जानकारी देते हुए बताया कि परिसर के अन्दर बने अधिवक्ताओं के चैम्बरों में अक्सर मारपीट की घटनाएं घटित होने की सूचना प्राप्त होती है इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएं।ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटित न हो। न्यायालय में गवाही देने आने वाले गवाह एवं मुकदमों से संबंधित विवेचक जो कोर्ट आते हैं उनके साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं जिसके कारण कानून एवं व्यवस्था का खतरा बना रहता है।

इस संबंध में ऐसे अधिवक्ताओं जिनके द्वारा पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया हो अथवा दुर्व्यवहार की आशंका हो के संबंध में जिला जज/प्रशासनिक अधिकारी को अवगत कराते हुए पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करायी जाये। पत्र में उल्लेखित बिंदुओं को अधिवक्ता सम्मान के साथ खिलवाड़ बताते हुए इसके विरोध में शुक्रवार को अधिवक्ता प्रदेश में विरोध दिवस मनायेंगे। सभी अधिवक्ता अपने जिलों/तहसीलों में जिलाधिकारी/उपजिलाधिकारी को उपरोक्त पत्रों के विरोध में ज्ञापन देंगे।

अधिवक्ता समाज उपरोक्त पत्रों से बेहद आहत हुआ है। शासन को चेतावनी दी है कि अगर अधिवक्ताओं को विश्वास में लेकर अविलम्ब उचित कदम नहीं उठाए गये तो बार काउंसिल ऑफ यूपी के सामने चरणबद्व आंदोलन छेड़ने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। विषय की गंभीरता पर विचार मंथन के लिए 22 मई को बार काउंसिल की आपात बैठक भी बुलाई गयी है।

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