हल्द्वानी: प्रकृति प्रेम के कवि थे सुमित्रानंदन पंत, कवियों ने रचनाओं से दी श्रद्धांजलि

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हल्द्वानी, अमृत विचार। हिंदी में छायावाद के चार स्तंभ माने जाते हैं। इनमें जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा का नाम आता है। अरुणोदय श्रीमती आनन्दी देवी रावत धर्मशाला परिसर नवाबी रोड में कविवर सुमित्रानंदन पन्त की जयन्ती के अवसर पर आज कवि सम्मेलन एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर साहित्यिक …

हल्द्वानी, अमृत विचार। हिंदी में छायावाद के चार स्तंभ माने जाते हैं। इनमें जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा का नाम आता है। अरुणोदय श्रीमती आनन्दी देवी रावत धर्मशाला परिसर नवाबी रोड में कविवर सुमित्रानंदन पन्त की जयन्ती के अवसर पर आज कवि सम्मेलन एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में काव्य पाठ करते कवि।

मुख्य अतिथि पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक उत्तराखंड प्रो. पीसी बाराकोटी और कार्यक्रम अध्यक्ष आरसी पंत ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर सुमित्रानंदन पन्त के चित्र पर माल्यार्पण किया। अरुणोदय संस्था के महामंत्री बिपिन चन्द्र पाण्डे ने उपस्थित अतिथियों एवं कवियों का स्वागत किया।

कवि सुभाषित श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. दीपा काण्डपाल ने सुमित्रानंदन पन्त जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से बताया। बिपिन चन्द्र पाण्डे ने उत्तराखंड दर्शन ” मेरे उत्तराखंड में चमन ही चमन है, देवभूमि है इस धरा को नमन है।” प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन के संयोजक जीवन चन्द्र जोशी विनायक ने पहाड़ों की पीड़ा पर अपनी रचना सुनाई। शब्दाक्षर के अध्यक्ष हिमांशु पाठक ने साहित्य व जीवन के सम्बन्ध पर अपनी कविता सुनाई।

डॉ. दीपा कांडपाल ने प्रकृति से संबंधित गीत सुनाया, पीताम्बर जोशी चेतक ने कुमाऊंनी गीत, निरंजन जोशी ने भारत के इतिहास को उकेरती रचना प्रस्तुत की। गीतकार सुभाषित श्रीवास्तव ने प्रकृति के सुकुमार कवि के जीवन पर कविता सुनाई। आईडी जोशी ने सुमित्रानंदन पन्त की रचनाएं सुनाई। युवा कवि रोहित केसरवानी ने हल्द्वानी की स्थिति पर रचना प्रस्तुत की। अध्यक्ष रमेश चंद्र पन्त ने अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ रचना सुनाई। मुख्य अतिथि ने सभी की रचनाओं की प्रशंसा करते हुए सुमित्रानंदन पन्त के प्रकृति प्रेम को जीवन में अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में जीडी सती, जितेन्द्र सिंह रौतेला, डीके पलड़िया, जीवन सिंह रावत, कैलाश तिवारी, नारायण दत्त जोशी आदि रहे।

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