नेपाल-भारत का संबंध लिच्छवि काल से चला आ रहा : राम प्रसाद

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अयोध्या। देवकाली बाईपास स्थित एक पैलेस में  बुधवार की शाम नेपाल-भारत की संस्कृति पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राम-जानकी विवाह-नृत्य नाट्य का मंचन करने के लिए वाराणसी की डॉ. ममता टंडन व उनके सहयोगी कलाकारों को बुलाया गया था। कलाकारों ने ऐसा समां बांधा की हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। कार्यक्रम का …

अयोध्या। देवकाली बाईपास स्थित एक पैलेस में  बुधवार की शाम नेपाल-भारत की संस्कृति पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राम-जानकी विवाह-नृत्य नाट्य का मंचन करने के लिए वाराणसी की डॉ. ममता टंडन व उनके सहयोगी कलाकारों को बुलाया गया था। कलाकारों ने ऐसा समां बांधा की हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नेपाल के राजदूत राम प्रसाद सुवेदी ने किया।

अयोध्या में सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक माहौल में दोनों देशों की प्रगाढ़ता को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बीपी कोइराला इंडिया- नेपाल फाउंडेशन के सहयोग से एक दिवसीय कार्यक्रम कराया गया। रामप्रसाद सुवेदी ने बताया कि जैसे बनारस से काशी विश्वनाथ और काठमांडू के पशुपतिनाथ एक दूसरे के पूरक हैं उसी तरह जनकपुर की  जानकी और अयोध्या के राम वह भी एक दूसरे के पूरक हैं।

नेपाल-भारत का संबंध लिच्छवि काल से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल दौरे पर कहा था कि हम दोनों मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए संस्कृति का आदान-प्रदान होना बहुत जरूरी है।

इस कार्यक्रम के संयोजक लक्ष्मी गोडबोले ने कहा कि बीपी कोइराला इंडिया नेपाल फाउंडेशन नेपाल एंबेसी नई दिल्ली के द्वारा समय-समय पर संस्कृति का आदान-प्रदान महिलाओं पुरुषों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देती रहती है। अयोध्या महोत्सव न्यास के अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव,भाजपा के क्षेत्रीय सह संयोजक रेणुका रंजन श्रीवास्तव, सचिव नाहिद कैफ, जिला उपाध्यक्ष चंद शेखर तिवारी के द्वारा संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आगाज किया गया था।

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