बरेली: नशीले कैप्सूल की सप्लाई चेन खंगालेगा पुलिस और ड्रग विभाग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। ड्रग विभाग की टीम ने गुरुवार को कस्बा शीशगढ़ में बस स्टैंड के सामने एक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर बेचे जा रहे प्रतिबंधित नीले कैप्सूल ( प्राक्सीवान स्पास ) की बड़ी खेप बरामद की थी। दवा व्यापारी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेजा गया। मगर नशीली दवाओं की …

बरेली, अमृत विचार। ड्रग विभाग की टीम ने गुरुवार को कस्बा शीशगढ़ में बस स्टैंड के सामने एक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर बेचे जा रहे प्रतिबंधित नीले कैप्सूल ( प्राक्सीवान स्पास ) की बड़ी खेप बरामद की थी। दवा व्यापारी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेजा गया। मगर नशीली दवाओं की इतनी बड़ी खेप मेडिकल पर कैसे पहुंची यह राज बरकरार है।अब ड्रग विभाग और पुलिस की टीम इसकी सप्लाई चेन को खंगालने में लगी है।

सहायक औषधि आयुक्त के संजय कुमार के नेतृत्व में निरीक्षण के दौरान औषधि निरीक्षक बबिता रानी और विवेक कुमार ने शीशगढ़ क्षेत्र में गांधी मेडिकल स्टोर से जब्त प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल ( प्राक्सीवान स्पास ) का स्टाक बरामद किया था। औषधि निरीक्षक के मुताबिक मौके से करीब 18 हजार प्रतिबंधित नीले कैप्सूल बरामद हुए। जिनकी बाजार में कीमत कर करीब 1.75 लाख रुपये बताई जा रही है। यह पहला मौका नहीं है जब नशीले कैप्सूल जिले में पकड़े गए हों। इससे पहले भी कई बार नशीले कैप्सूल पकड़े जा चुके हैं।

मगर अधिकतर मामलों में अभी तक विभाग और पुलिस इनके नेटवर्क तक पहुंचने में नाकाम रही है। सूत्रों की माने तो फर्जी बिलों के जरिए यह पूरा खेल चलाया जाता है जिसके चलते नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल होता है। दूसरे राज्यों से लाकर से चोरी छिपे बिलों में फर्जीवाड़ा कर इन प्रतिबंधित दवाओं को बरेली जैसे शहरों में खपाया जाता है। अगर कोई मेडिकल संचालक पकड़ा जाता है तो वह पूरे नेटवर्क के बारे में बताने को तैयार नहीं होते।

दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं तार
शीशगढ़ में जिस गांधी मेडिकल से प्रतिबंधित नीले कैप्सूल मिले वो इलाके के बड़े दवा कारोबारी अब्दुल हसीब द्वारा संचालित किया जाता है। 18 हजार कैप्सूल मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि संचालक द्वारा दूसरे मेडिकल स्टोरों पर भी इसकी सप्लाई की जा रही होगी। अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि पूरे मामले में केवल जिले ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी तार जुड़े हो सकते हैं।

इस बात की जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी संख्या में नशीले कैप्सूल की खेप मेडिकल संचालक तक कहां से पहुंची। प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जिसमें पुलिस और ड्रग विभाग जांच कर रहा है। -विवेक कुमार, औषधि निरीक्षक

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