बाराबंकी: आंधी-पानी से आम की उपज में आई कमी, शुरुआती दौर में ही चढ़ा बाजार
बाराबंकी/अमृत विचार। फलों का राजा आम इस बार आम लोगों के लिए खास ही रहेगा। जिले में आम की पैदावार 70% तक कम हुई है। आम का सीजन भी 2 महीने के बजाय इस दिन एक से डेढ़ महीने ही रहने की उम्मीद है। शुरुआती दौर में ही आम का बाजार चढ़ा हुआ है। “पाल’ …
बाराबंकी/अमृत विचार। फलों का राजा आम इस बार आम लोगों के लिए खास ही रहेगा। जिले में आम की पैदावार 70% तक कम हुई है। आम का सीजन भी 2 महीने के बजाय इस दिन एक से डेढ़ महीने ही रहने की उम्मीद है। शुरुआती दौर में ही आम का बाजार चढ़ा हुआ है। “पाल’ का दशहरी आम भी 80 रूपए प्रति किलो बिक रहा है। डाल से तोड़ा गया पक्का आम का दाम तो और भी ज्यादा है।
आम को सबसे अधिक नुकसान बौर आने के साथ ही शुरू हो गया था। कृषि विशेषज्ञों की माने तो बोर में ही कीट लग जाने के कारण पैदावार कम हुई। रही सही कसर आंधी और तूफान ने पूरी कर दी।
मलिहाबाद के बाद बाराबंकी को आम की बड़ी बेल्ट माना जाता है। इसलिए यहां का आम पूरे प्रदेश के व्यापार को प्रभावित करता है। मसौली आम की बड़ी बेल्ट है।
मसौली कस्बे के प्रसिद्ध आम व्यापारी मुख्तार बताते हैं कि इस समय दशहरी 60 रूपए, बंबई 40 रूपए, खुशबू गोला 50 रूपए, सुरखा 70 रूपए, जर्दालू 70 रूपए, मालदार 60 रूपए सहित आंशिक मात्रा में डाल से टूटी हुई दशहरी 80 रूपए किलो बिक रही है।
सबसे ज्यादा लोग दशहरी आम को पसंद करते हैं। इसके बाद लोग जर्दालू और सुरखा व खुशबू गोला को ले जाते हैं। अभी ज्यादातर आम पाल का ही आ रहा है। आंशिक मात्रा में डाल की टूटी हुई दशहरी मिलती है। कच्चे आम 20 से 25 रूपए किलो में बिक रहे हैं।
पोषक तत्वों का खजाना है आम
आम चाहे कच्चा हो या पक्का दोनों ही तरीके से विटामिन से पोषक तत्वों का खजाना होता है। कच्चे आम में पके आम की तुलना में ज्यादा विटामिन सी होता है।
ताजा कच्चा आम रक्त संबंधी विकार दूर करने में मदद करता है। रक्त कोशिकाओं के लचीलेपन को बढ़ा कर नई रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है। जहां पके आम में एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन ए, सी, बी6, फोलेट और कई आवश्यक पोषक तत्व जैसे पोटेशियम, कॉपर, ओमेगा 3 और पॉली सेचुरेटेड फैटी एसिड व अमीनो एसिड पाए जाते हैं। तो कच्चा आम विटामिन सी और बी दोनों का अच्छा स्रोत होता है।
पके हुए आम में पोटेशियम की भरपूर मात्रा होने के चलते हृदय की अनियमित धड़कनों और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। इसमें आयरन का स्रोत अच्छा होने के कारण यह गर्भवती महिलाओं और एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी होता है। जिसके चलते हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है।
ज्यादा सेवन सेहत कर सकता है खराब
सीएमओ डॉ. राम वर्मा ने बताया कि अधिक मात्रा में कच्चा आम का प्रयोग न करें। इससे गला खराब होने के साथ-साथ दस्त और अपच की समस्या हो सकती है। कच्चे आम को उसकी चोंपी निकाले बगैर न खाएं। इसकी चोंपी से गले व मुंह में संक्रमण हो सकता है। अभी बाजारों में उपलब्ध ज्यादातर आम केमिकल से पकाए गए हैं। जिनके खाने से आपकी सेहत ज्यादा खराब हो सकती है। इसलिए अभी 15 दिनों तक संयमित रूप से आम का प्रयोग करें।
उन्होंने आगे कहा कि डाल से टूटे आम आने के बाद भी आम के अत्यधिक सेवन से बचाव करें। क्योंकि इससे आपको अपच और दस्त की शिकायत हो सकती हैं। इसमें मौजूद कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की अत्याधिक मात्रा के चलते इसे अधिक मोटे लोगों को खाने से बचाव करना चाहिए।
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