हल्द्वानी: जाने-माने भूगोलविद बीआर पंत और डॉ. विवेक पंत की रची पुस्तकों को विमोचन, पहाड़ पुस्तक प्रदर्शनी में उमड़े पाठक

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हल्द्वानी, अमृत विचार। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज के लाल बहादुर शास्त्री सभागार में आज जाने माने साहित्यकारों और शिक्षाविदों की उपस्थिति में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस दौरान पहाड़ पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड के जाने-माने लेखकों की पुस्तकों को खरीदने के लिए पाठक उमड़ पड़े। कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध …

हल्द्वानी, अमृत विचार। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज के लाल बहादुर शास्त्री सभागार में आज जाने माने साहित्यकारों और शिक्षाविदों की उपस्थिति में दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस दौरान पहाड़ पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड के जाने-माने लेखकों की पुस्तकों को खरीदने के लिए पाठक उमड़ पड़े।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मौजूद शिक्षाविद और साहित्यकार।

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध भूगोलविद और कॉलेज के पूर्व प्राचार्य बीआर पंत की पुस्तक “उत्तराखंड जनसंख्या परिदृश्य एवं परिवर्तन” के साथ ही डॉ. विवेक पंत द्वारा लिखी पुस्तक “पत्थरों में धड़कती कला- कुमाऊं हिमालय का चंदकालीन स्थापत्य” का विमोचन किया गया। इस मौके पर शिक्षाविदों ने पुस्तकों की समीक्षा भी की।

पुस्तक के बारे जानकारी देते जाने माने भूगोलविद बीआर पंत।

अमृत विचार से खास बातचीत में लेखक बीआर पंत ने बताया कि किसी भी क्षेत्र की आर्थिक विकास प्रक्रिया उस क्षेत्र की जनसंख्या के स्थानिक स्वभाव से संचालित होती है। जनसंख्या के तीन स्थानिक गुण आर्थिक विकास को प्रभावित करते हैं। जिनमें पहला और महत्वपूर्ण है जनसंख्या किस भूभाग में किस दबाव एवं अनुपात के साथ निवास कर रही है। और स्थानीय, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से पूर्णत: सामंजस्य बनाकर संतुष्ट है या नहीं। दूसरा महत्वपूर्ण कारक है जनसंख्या की स्थानिक गत्यात्मकता एवं संसाधनों तक पहुंच स्थानीय जनसंख्या को प्राप्त है या नहीं।

तीसरा मुख्य कारक है जनसंख्या की आंतरिक संरचना जिसमें लिंगानुपात, आयु संरचना, शिक्षा, ग्रामीण एवं नगरीय निवास, व्यावसायिक संरचना, पलायन और सांस्कृतिक विशेषताएं समेत अन्य कारक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 1790 जब उत्तराखंड में गोरखा शासन आया तब राज्य की आबादी करीब दो लाख थीं। 2011 की राज्य की जनसंख्या एक करोड़ छियासी हजार 292 थी। ऐसे में 2022 की जनगणना में आबादी का आंकड़ा दो करोड़ से पार हो जाएगा।

लेखक बीआर पंत ने कहा कि उत्तराखंड में आबादी बढ़ने की गति और परिवर्तनों पर जब तक सटीक अध्ययन नहीं होगा तब तक आर्थिक विकास की योजनाएं फलीभूत नहीं हो सकती हैं। ऐसे में यह पुस्तक शोधकर्ताओं के साथ-साथ विकासपरक योजनाएं बनाने में राज्य सरकार के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। इस मौके पर कई गणमान्य जन मौजूद रहे।

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