बरेली: पांच माह में 60 बच्चे कुपोषण का शिकार, एनआरसी वार्ड फुल
अमृत विचार, बरेली। कुपोषण का दंश मिटाने के लिए शासन की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसके बाद भी जिले में कुपोषण तेजी से पांव पसार रहा है। पांच माह में जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र (एनआरसी ) में 60 कुपोषित बच्चे भर्ती हुए हैं। लगातार बढ़ रही बच्चों की संख्या …
अमृत विचार, बरेली। कुपोषण का दंश मिटाने के लिए शासन की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसके बाद भी जिले में कुपोषण तेजी से पांव पसार रहा है। पांच माह में जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र (एनआरसी ) में 60 कुपोषित बच्चे भर्ती हुए हैं। लगातार बढ़ रही बच्चों की संख्या के चलते यह वार्ड फुल हो गया है। एनआरसी में कुपोषण से ग्रसित बच्चों की दर में भी लगातार वृद्धि हो रही है। जनवरी में यह दर 58 , फरवरी में 40, मार्च में 72, अप्रैल में 80 व मई में यह दर बढ़कर 85 फीसदी तक पहुंच गई है।
बीमारी के यह हैं लक्षण
एनआरसी की डायटिशियन डॉ. रोजी जैदी के अनुसार कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों का पता वह केंद्र में पहुंचने के बाद जांच के आधार पर करती हैं। मगर प्राथमिक जांच में परिजन खुद ही पहचान सकते हैं। उन्होंने बताया कि जो बच्चे स्तनपान न कर रहे हों, सुस्त दिखाई दे रहे हों, दोनों पैरों में सूजन हो, हड्डियां दिखने लगें, पेट सूज जाए, बाल रूखे से रहने लगें, बीमार बहुत जल्दी हो रहे हों, सांस तेज-तेज चल रही हो, छाती धंसती जा रही हो, लगातार उल्टियां और दस्त हो रहे हों, तेज बुखार भी आने लगे, त्वचा पर अपने आप घाव होने लगे, बांह की गोलाई कम रह जाए, ऐसे बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में हो सकते हैं। उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में लाना चाहिए। जिससे सही समय पर इलाज के बाद उन्हें ठीक किया जा सके।
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