बरेली: कुतुबखाना बाजार में 3000 से ज्यादा दुकानें व शोरूम, पार्किंग एक नहीं
अमृत विचार, बरेली। वक्त के साथ बरेली शहर स्मार्ट होता चला गया और सड़कें सिकुड़ती गईं। जिन सड़कों से दोपहिया वाहन आसानी से निकल जाते थे आज उन सड़कों पर जरूरत की मांग ने अवैध वाहन पार्किंग बनवा दीं। अमृत विचार ने मंगलवार को ”स्मार्ट सिटी मांगे पार्किंग” अभियान के तहत कोहाड़ापीर, कुतुबखाना, गली आर्य …
अमृत विचार, बरेली। वक्त के साथ बरेली शहर स्मार्ट होता चला गया और सड़कें सिकुड़ती गईं। जिन सड़कों से दोपहिया वाहन आसानी से निकल जाते थे आज उन सड़कों पर जरूरत की मांग ने अवैध वाहन पार्किंग बनवा दीं। अमृत विचार ने मंगलवार को ”स्मार्ट सिटी मांगे पार्किंग” अभियान के तहत कोहाड़ापीर, कुतुबखाना, गली आर्य समाज, बड़ा बाजार, कटरा मानराय, शास्त्री मार्केट, गली नवाबान क्षेत्र की सड़कों की स्थिति देखी। व्यापारियों के साथ ही ग्राहकों से भी बात की। कई घंटे जांच में यह बात सामने आई कि इन बाजार क्षेत्र में करीब तीन हजार से अधिक दुकानें व छोटे शोरूम बने हुए हैं लेकिन पार्किंग एक भी नहीं है।
इसके पीछे के कारणों को जानने के लिए कई व्यापारियों से बात की जिन्होंने बाजार की सड़कों को सिकुड़ते हुए देखा है। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि बाजार की पार्किंग ही विकास का पहिया होती है लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों ने बाजार में पार्किंग बनवाने के प्रयास नहीं किए। यही वजह रही कि कई सरकारें आईं और विकास की गंगा बहाकर चली गईं लेकिन विश्व प्रसिद्ध झुमका बाजार में पार्किंग की व्यवस्था कोई नहीं कर पाया। शहरवासियों का दुर्भाग्य ही है कि स्मार्ट सिटी में ऐसी पार्किंग की व्यवस्था नहीं हुई, जहां दोपहिया, चार पहिया वाहन खड़े करके लोग बाजार में खरीदारी कर सकें। शहर का सबसे पुराना बाजार कुतुबखाना है, जिसे झुमका बाजार नाम से भी जानते हैं।
हर रोज 10 हजार वाहन आते हैं पर खड़ा करने की नहीं जगह
छोटी बड़ी दुकानें और शोरूम में औसतन पांच कर्मचारी हैं। इनमें से तीन कर्मचारी बाइक से आते हैं। इस तरह 7500 बाइकें और 2500 दुकानों के मालिकों के वाहन यानि 10 हजार वाहन हर रोज बाजार में आते हैं लेकिन इनके खड़े होने का कोई साधन नहीं है। कोई दुकान से दूर किसी गली में खड़ी करता है तो कोई किसी खाली दुकान और उजड़ी दुकान के अंदर वाहन खड़े करते हैं। कुछ जगह दुकानों के सामने भी वाहन खड़े होते हैं। इन सबके बाद इन दुकानों में ग्राहक भी वाहनों से आते हैं तो वह भी उसी तंग जगह में अपने वाहन खड़े करते हैं। कभी कभी ग्राहकों को वाहन खड़ा करने से दुकानदार मना करने लगते हैं। यह स्थिति दुकानदार के लिए कष्टदायक होती है कि उसके ग्राहक को वाहन खड़े करने की जगह नहीं मिलती।
पुल बनेगा तो कैसे आएंगी कारें, स्मार्ट सिटी में धन की बर्बादी ज्यादा
स्मार्ट सिटी में इस समय अफसर कोहाड़ापीर से कुतुबखाना पुल निर्माण पर अड़े हैं तो व्यापारी विरोध कर रहे हैं। इस विरोध और पक्ष के बीच कोई यह नहीं सोच रहा कि पुल बन जाएगा तो मल्टीलेवल कार पार्किंग तक छह मीटर सर्विस लेन के बीच से कारें कैसे आएंगी और यदि आ भी गईं तो पार्किंग से निकलने के दौरान क्या जाम नहीं लगेगा। बातचीत में व्यापारी बताते हैं कि स्मार्ट सिटी में शहर के विकास की कम धन की बर्बादी ज्यादा हो रही है। स्मार्ट सिटी में किसी विधायक व मंत्री का भी कोई हस्तक्षेप नहीं है, इसलिए अफसर मनमर्जी से धन खर्च कर रहे हैं।
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