लखीमपुर-खीरी: फार्मासिस्ट को बचाने के लिए अधिकारी बुन रहे तानाबाना

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लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। बीती शनिवार को करोडों की लावारिस दवाएं बरामद होने के मामले में अब अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने वाले फार्मासिस्ट को बचाने के लिए ताना बाना बुनते नजर आ रहे है। बताया जाता है कि जांच अधिकारियों ने फार्मासिस्ट को कम से कम सजा मिले ऐसी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है। …

लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। बीती शनिवार को करोडों की लावारिस दवाएं बरामद होने के मामले में अब अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने वाले फार्मासिस्ट को बचाने के लिए ताना बाना बुनते नजर आ रहे है। बताया जाता है कि जांच अधिकारियों ने फार्मासिस्ट को कम से कम सजा मिले ऐसी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी है। सीएमओ ने जांच रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए स्वास्थ्य निदेशक को फारवर्ड कर दी है। फिलहाल सूत्रों की माने तो अधिकारियों ने केवल दवाओं को गलत तरीके से डिस्पोजल न करने की रिपोर्ट तैयार की है।
चार जून को भाजपा कार्यालय के पीछे कब्रिस्तान की जगह पर खाली पडे़ प्लाट में जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट आर के गुप्ता ने अपनी गलती पर पर्दा डालने का प्रयास करते हुए दवाओं को फिकवा दिया था। साथ ही चौकीदार से यह भी कहा गया था कि जनहित में इन दवाओं का प्रयोग हानिकारक है लिहाजा सभी को जमीदोज कर दिया जाए।

इधर चौकीदार ने खुद का लाभ देखते हुए दवाओं की शीशी को एक एक खाली करते हुए कबाड में बेंचने की कवायद शुरू कर दी थी। इधर मामला मीडिया में आने के बाद फार्मासिस्ट के साथ साथ स्वास्थ्य महकमें के हाथ पांव फूल गये। आनन फानन दवाओं की इन्वेंट्री बनवाते हुए उसे दोबारा जिला अस्पताल लाया गया जहां पर दवाओं की गिनती हुई।

बता दें कि मामले को संगीन मानते हुए सीएमओ ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए तीन सदस्यीय टीम गठित की थी और पूरे प्रकरण की पारदर्शिता के साथ जांच करने के आदेश दिये थे। बताते है कि बुधवार को जांच टीम ने अपनी जांच पूरी करते हुए जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है जिसका सीएमओ ने अवलोकन किया और उसे आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया है।

सूत्र बताते हैं कि जांच रिपोर्ट में फार्मासिस्ट को बचाने की पूरी तैयारी कर दी गयी है। जिस तरह से जांच रिपोर्ट तैयार की गयी है उस लिहाज से फार्मासिस्ट का महज इंक्रीमेंट अवरूद्ध हो सकता है। अब सवाल यह उठता है कि बड़ी गलती की सजा क्या केवल इंक्रीमेंट रोकने से पूरी हो जाएगी। फिलहाल अधिकारियों ने ताना बाना बुनते हुए विभाग के फार्मासिस्ट को बचाने की पूरी तैयारी कर ली है।

फार्मासिस्ट ने अपने अधिकारी को भी अंधेरे में रखा
इतनी भारी मात्रा में सरकारी दवाओं का एक्सपायर हो जाना और अपने इंचार्ज अधिकारी एसके मिश्रा को इस बात की भनक तक न लगने देना, उन्हें अंधेरे में रखने जैसा है। फार्मासिस्ट आर के गुप्ता ने प्रशासनिक अधिकारी को एक बार भी इस बात की जानकारी नहीं दी कि दवा स्टोर में कई साल पुरानी दवाएं जोकि एक्सपायर हो गयी है, रखी हुई है। प्रशासनिक अधिकारी को एक्सपायर दवाओं की जानकारी न देने के पीछे लोग तरह तरह की बातें करते हुए देखे जा रहे है।

कहीं बाहर से तो दवा खरीदने की नहीं हो रही थी साजिश
कारपोरेशन से दवाओं की आपूर्ति के बावजूद कुछ जरूरत की दवाएं समय पर उपलब्ध नहीं पा रही थी। दवाओं का समय के उपलब्ध न होना, और प्राइवेट फर्माे को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तो कहीं दवाओं की इतनी बड़ी खेप का एक्सपायर होने के छोड दिया गया। दवाओं को बाहर से खरीदने को लेकर दवाओं की कमी दर्शायी गई हो और उन्हें खरीदने की आदेश दिया गया हो। फिलहाल हाल में ही दवा खरीदने की बात कोई भी स्वीकार नहीं कर रहा है।

अगर देते समय पर जानकारी तो नहीं होती विभाग की किरकिरी
जिला अस्पताल में दवा स्टोर प्रभारी आर के गुप्ता ने यदि अपने प्रशासनिक अधिकारी एसके मिश्रा सहित सीएमएस और सीएमओ को समय से इस बात की जानकारी दी होती तो शायद विभाग की जो किरकिरी हों रही है वह नहीं होती। अधिकारियों का कहना है कि यदि दवाएं एक्सपायर हो गयी थी जो उसके डिस्पोजल के भी तरीके होते है जो नियम के अनुसार होते।

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