ओ री चिरैया! अब इस आंगन में दोबारा ना आना रे…
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिस समाज में ऐसे दरिंदों की भीड़ हो, जो 14 साल की बेटी को कुत्तों की भांति नोचें और हवस का शिकार बनाएं, वहां आधी आबादी की सुरक्षा पर सवाल तो उठेंगे ही। बेटियों के साथ पशुवत बर्ताव का सिलसिला आखिरकार कब थमेगा? समय रहते इस सवाल का जवाब यदि हम नहीं तलाश …
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिस समाज में ऐसे दरिंदों की भीड़ हो, जो 14 साल की बेटी को कुत्तों की भांति नोचें और हवस का शिकार बनाएं, वहां आधी आबादी की सुरक्षा पर सवाल तो उठेंगे ही। बेटियों के साथ पशुवत बर्ताव का सिलसिला आखिरकार कब थमेगा? समय रहते इस सवाल का जवाब यदि हम नहीं तलाश सके, तो हमारी चिरैया हमसे ही मुंह मोड़ लेंगी। दोबारा हमारे आंगन में आने की हिम्मत वह नहीं जुटा सकेंगी। कहने पर बाध्य भी होगीं कि अब ऐसे आंगन में उतरने से वह सदा परहेज करेंगी।
पांच मई को सिविल लाइन पुलिस के हाथ लगी नेपाली किशोरी की वेदना को यदि हम करीब से महसूस करने की कोशिश करें, तो पर्दे के पीछे की भयावह तस्वीर आइने की तरह साफ मिलेगी। तस्वीर के साफ होने से ना सिर्फ खून के रिश्तों से विश्वास उठेगा, बल्कि हमारे ही बीच छिपे हवस के भूखे भेड़ियों के चेहरे भी बेनकाब होंगे। गौर करें बाल कल्याण समिति द्वारा दर्ज पीड़िता के उस बयान पर, जिसे दर्द के रूप में नाबालिग नेपाली बेटी ने बयां किया। नया पीठ के सामने किशोरी ने कबूला कि भूख व भय के कारण उसे सिलसिलेवार दुष्कर्म का सामना करना पड़ा। 14 वर्ष की उम्र में मां-बाप ने उसे रामपुर के रहने वाले इमरान के हाथ सौंप दिया।
नाबालिग बेटी से नाजायज रिश्ते को मुकम्मल मुकाम देने के लिए निकाह का ताना-बाना बुना गया। लाचार व बेबस बेटी निकाह को नियत का खेल समझ चुप हो गई। कच्ची उम्र में विवाह के बंधन का बोझ ढो रही नेपाली किशोरी के अरमान तब तार-तार हो गए, जब पति इमरान ने अपनी ही पत्नी को छोटे भाई की बाहों में डाल दिया। पति के इस रूप में पीड़िता को इस कदर उद्वेलित किया कि वह बागी हो गई। शातिर इमरान नेपाली किशोरी के मंसूबे को भांप चुका था। इमरान ने 30,000 रुपए में दिल्ली के रहने वाले 50 वर्षीय एक व्यक्ति के हाथ नेपाली किशोरी का सौदा कर दिया। पेट की आग ने जिस रूप में नेपाली किशोरी को सच का सामना कराया, उससे किशोरी पूरी तरह टूट गई। 50 वर्षीय असलम ने नेपाली किशोरी से दिल्ली में 10 दिनों तक दुष्कर्म किया।
सिलसिलेवार दुष्कर्म की शिकार नेपाली बेटी असलम के चंगुल से मुक्त होने का प्रयास करने लगी। कोशिश में जब बेटी को सफलता मिली तो वह नई जिंदगी की उम्मीद लेकर यहां आ गई। तब नेपाली बिटिया को यह जरा भी अनुमान नहीं होगा कि हवस के भूखे भेड़िये जिंदगी की राह में उसका इंतजार कर रहे हैं। मुरादाबाद जंक्शन पर ऑटो चालक नाजिम ने नेपाली किशोरी पर अपना जाल फास फेंका। पांच दिनों तक वह नेपाली किशोरी की अस्मत से खेलता रहा। दरिंदों को सख्त सजा दिलाने की कोशिश में पुलिस को अकाट्य साक्ष्य एकत्र करने होंगे। बिटिया सुरक्षित हाथ तक पहुंचे और उसके आगे का जीवन सुगम हो इसे भी पुलिस को ही सुनिश्चित करना होगा।
सीडब्ल्यूसी कर रही नेपाली एंबेसी के प्रतिनिधि का इंतजार
नेपाली किशोरी के सुरक्षित जीवन की चिंता मुरादाबाद की बाल कल्याण समिति को भी सता रहा है। मारपीट के सदस्य हरिमोहन गुप्ता ने कहां की नेपाली एंबेसी लगातार संपर्क में है। मानव तस्करी वह दुष्कर्म की घटना के लिए किशोरी के मां-बाप भी कम जिम्मेदार नहीं है। सिर्फ गरीबी के चलते हैं बेटी को दूसरे के हाथ बेचना गैर कानूनी है। न्याय पीठ नेपाली एंबेसी से किशोरी के मां-बाप को सजा दिलाने की मांग करेगी। साथ है किशोरी का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने का भी प्रयास करेगी।
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