अयोध्या: 11 ब्लाकों के 1261 गांवों को होना था हाईटेक, अब तक केवल तीन में हुआ काम

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अयोध्या। राजस्व गांवों को हाईटेक करने की योजना अभी जिले में झटके खा रही है। नेशनल आप्टिकल फाईबर नेटवर्क (नौफन) योजना के तहत मार्च-2021 तक आप्टिकल फाईबर केबल बिछा कर सभी 1261 गांवों के पंचायत भवन को इंटरनेट सेवा से जोड़ा जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण व बजट के अभाव के वजह से सभी गांव …

अयोध्या। राजस्व गांवों को हाईटेक करने की योजना अभी जिले में झटके खा रही है। नेशनल आप्टिकल फाईबर नेटवर्क (नौफन) योजना के तहत मार्च-2021 तक आप्टिकल फाईबर केबल बिछा कर सभी 1261 गांवों के पंचायत भवन को इंटरनेट सेवा से जोड़ा जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण व बजट के अभाव के वजह से सभी गांव अभी भी हाईटेक नहीं हो सके।

ऐसे में ग्रामीणों को अभी भी छोटे- मोटे कार्य के लिए भागकर शहर आना पड़ता है। जिले में इस योजना के तहत पंचायत भवनों को हर तरह से सुसज्जित किया जाना था लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका।

केंद्र सरकार ने नेशनल आप्टिकल फाइबर नेटवर्क (नौफन)योजना को करीब चार वर्ष पहले लांच किया था। इस खास योजना से पंचायत भवन तक आप्टिकल फाइबर केबल बिछाकर गांवों को डिजिटल बनाया जाना था।

करीब तीन वर्ष पहले इस दिशा में कार्य भी प्रारम्भ कर दिया गया पर सोहावल , पूराबाजार , बीकापुर ब्लाकों को छोड़ दिया जाए तो जिले के अन्य ब्लाकों में कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। जबकि जिले के सभी 11 ब्लाकों में योजना के तहत लाइन बिछाई जानी थी। जिन ब्लाकों में काम कुछ हुआ भी वहां भी यह मूर्तरूप में नहीं आ सकी है।

दूसरे फेज के सभी गांवों में शुरू नहीं हुए काम

नौफन योजना के पहले फेज के तहत बीकापुर के 25 व सोहावल के 34 गांवों में जमीन के भीतर आप्टिकल फाइबर केवल बिछा दिए गए। दूसरे फेज में चयनित ब्लाकों के राजस्व गांवों को हाई स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए चयन किया गया था। योजना के तहत आप्टिकल फाइबर केबल पंचायत भवन तक पहुंचाया जाना है, लेकिन यहां पर भी गांवों को डिजिटल बनाने की योजना अधूरी रह गई।

पंचायत भवनों में मॉडम नहीं लगाया

जब जिन ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों को ऐसा लगा कि जाति प्रमाणपत्र आय प्रमाणपत्र , आधारकार्ड, पासपोर्ट आदि के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा। पर ग्रामीणों के उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कुछ गांवों में जमीन के भीतर आप्टिकल फाइबर केबल बिछा तो दिया गया पर पंचायत भवन में मॉडम लगाकर इंटरनेट सेवा से गांवों को अभी भी नहीं जोड़ा गया है, जिसके चलते गांवों को डिजिटल बनाने की योजना को जोर का झटका लगा है।

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पंचायत भवन वाई-फाई से लैस होने पर इंटरनेट से कोई भी करना आसान हो जाएगा। लेकिन अभी भी गांव डिजिटल नहीं हो हुए हैं। जिससे लोगों को जन सेवा केन्द्रों का सहारा लेना पड़ रहा है या शहर आना पड़ता है।

कोरोना संक्रमण व बजट के अभाव के कारण कार्य काफी प्रभावित हुआ है। अब प्रोजेक्ट को दिसम्बर 2022 तक पूरा कराने के लिए जोर लगा दिया गया है। इसके लिए बीएसएनएल विभाग को पत्र लिखा गया है। – अनीता यादव, सीडीओ

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