लखीमपुर-खीरी: एसी में अधिकारी तो पंखे को तरस रहे रोडवेज के यात्री
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। शहर के बीचोबीच बने रोडवेज बस स्टेशन में यात्रियों को सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। एसी कमरों में बैठे अधिकारियों को यात्रियों की परेशानियां नहीं दिख रही है। हर रोज सैकड़ों की संख्या में यात्री जिला मुख्यालय से अपने गंतव्य को रवाना होते हैै। यात्रियों का कहना …
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। शहर के बीचोबीच बने रोडवेज बस स्टेशन में यात्रियों को सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। एसी कमरों में बैठे अधिकारियों को यात्रियों की परेशानियां नहीं दिख रही है। हर रोज सैकड़ों की संख्या में यात्री जिला मुख्यालय से अपने गंतव्य को रवाना होते हैै। यात्रियों का कहना है कि रोडवेज केवल कागजों पर यात्री सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है जबकि हकीकत इससे परे है। यात्रियों ने रोडवेज परिसर में पानी और पंखों को दुरूस्त कराने की मांग की है।
स्थानीय रोडवेज बस अडडे पर हर रोज लखनउ, सीतापुर, बहराइच, गोला, शाहजहांपुर, बरेली के साथ साथ दिल्ली रूपैडिहा के सैकड़ों यात्री अपने अपने गंतव्य को आते और जाते है। लेकिन बस अडडे पर यात्रियों के लिए सुविधाओं का टोटा है। यहां पर आने वाले यात्रियों को न तो शु़द्ध पानी ही मयस्सर है और न ही बैठने के लिए पर्याप्त स्थान। होता यह है कि यात्रियों को बस के लिए घण्टों खडे खडे ही इंतजार करना पड़ता है।
बस अडडा परिसर के अंदर और आस पास गदंगी का अम्बार लगा देखा जा सकता है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की अनदेखी का यह आलम है कि बस अडडा दिन पर दिन अपना वजूद खोता हुआ दिखायी दे रहा है। यहां के शौचालय भी गंदे है। खासकर महिलाओं को इस असुविधाओं को उठाना पड रहा है। पानी के लिए परिसर के भीतर एक नल लगा है लेकिन वह लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहा है।
वहीं भीतर एक आरओ की टंकी लगी है जिससे भी गर्म पानी निकलता है। रोडवेज के जिम्मेदार अफसर एसी कमरों को छोडने की बिल्कुल भी तैयार नहीं दिख रहे है वहीं इस तपती धूप के बचने के लिए या तो यात्री खुले में बैठे या फिर परिसर में लगे एक पंखे के नीचे। लेकिन संख्या ज्यादा होने की दशा में यह पंखा भी लोगों का राहत नहीं दे पाता है। फिलहाल यात्रियों को सुविधा देने का दावा करने वाला रोडवेज प्रशासन सिर्फ कागजों में ही सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यात्रियों ने एआरएम से रोडवेज पर जरूरी सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है।
प्यास बुझाने को बाहर से खरीदना पड़ता पानी
रोडवेज पर आने वाले यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए अपनी जेबें ढीली करनी पड़ती है। परिसर में शीतल पेयजल की कोई व्यवस्था न होने के चलते लोग बाहर की दुकानों से 10 रूपये और 20 रूपये की बोतल खरीदकर प्यास बुझाते है। लोगों का कहना है कि यदि रोडवेज परिसर में ही अगर पानी आसानी के साथ मिल जाए तो आखिरकार पैसे खर्च करने की क्या जरूरत है।
रोडवेज की बस से हफ्ते में दो से तीन बार लखनऊ और शाहजहांपुर जाना होता हैं। बस अडडे पर आने के बाद करीब बीस मिनट तक गर्मी और तपती दुपहरी में परेशान होना पड़ता है। जब बस रवाना होती है तो थोडी राहत जरूर मिलती है—कल्लू।
रोडवेज के अधिकारी सुविधा देने के लाखों दावे कर लेे लेकिन हकीकत किसी से छुपी नहीं है। यहां पर तमाम असुविधाएं हावी है लेकिन अधिकारी कुछ भी करने की जदोजेहद नहीं करते दिखायी दे रहे है। यात्री परेशान होकर अगर शिकायत भी करता है तो कोई सुनने वाला नहीं–रामसेवक।
रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। पूरे परिसर में गंदगी फैली है। शौचालय की हालत बेहद खराब है। विभागीय अफसरों को ध्यान देने की जरूरत है। वरना यह बस अडडा जल्द की वजूद खो देगा। पेयजल किल्लत और शौचालय की बदहाली सबसे बड़ी समस्या है—छोटू।
रोडवेज यात्रियों से सुविधाओं के बदले पूरा किराया वसूूल करता है लेकिन सुविधाएं नहीं देता। स्थानीय बस अडडे से रात में आठ बजे के बाद गोला और लखनऊ जाने के लिए कोई भी बस आसानी से नहीं मिलती है। कई कई बार लोगों को तीन से चार घण्टों तक इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों को पहले पर्याप्त संख्या में बसों का संचालन शुरू करवाना चाहिए—कमलेश।
मौजूदा समय में रोडवेज पर कुछ दिक्कतों की शिकायतें मिली है। रही बात रात में बस न मिलने की तो जब पर्याप्त संख्या में यात्री एकत्र हो जाते है। बस उपलब्ध कराकर उन्हें भेजा जाता है। एकाध लोगों के लिए बस भेजने से रोडवेज का घाटा होगा। फिलहाल यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। जल्द ही सभी को लाभ मिलेगा—जोगेन्द्र सिंह, एआरएम।
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