Blood Donation Day 2022 : लगातार 18 वर्षों से रक्तदान कर रहे हैं अनुज
आदित्य कांत शर्मा, अमृत विचार। जब हम रक्तदान करते हैं तो हम प्रत्यक्ष रूप से केवल रक्त का दान करते हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से हम जीवनदान करते हैं। रक्त लेने वाले रोगी के लिए रक्तदाता जीवनदाता ही होता है। जिसने उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी होती है। इसलिए रक्तदान को महादान कहा …
आदित्य कांत शर्मा, अमृत विचार। जब हम रक्तदान करते हैं तो हम प्रत्यक्ष रूप से केवल रक्त का दान करते हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से हम जीवनदान करते हैं। रक्त लेने वाले रोगी के लिए रक्तदाता जीवनदाता ही होता है। जिसने उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी होती है। इसलिए रक्तदान को महादान कहा गया है। 14 जून विश्व रक्तदाता दिवस पर अमृत विचार ऐसे युवक के बारे में बात कर रहा है। जिसने अपने जीवन को रक्तदान के महाकार्य में लगा दिया हैं। वह पिछले 18 वर्षों से वह स्वयं रक्तदान कर रहा है, बल्कि रक्तदान करने के लिए वह समाज को भी जोड़ रहा है।
नगर के गणेश कालोनी निवासी अनुज वार्ष्णेय अन्नू महज 18 वर्ष की आयु से रक्तदान करने लगे, जब वह इंटर के छात्र थे। तक प्रथम बार रक्तदान किया था। उसके महत्व को समझा और रक्तदान करने का सिलसिला शुरु हो गया। यह सिलसिला पिछले 18 वर्षों से कायम है। अनुज इस पर भी नहीं रुके उन्होंने 2015 में जीवन रक्तदाता संस्था बनायी। जिसमें उन्होंने कुछ ऐसे लोग जोड़े जो रक्तदान करते थे या करना चाहते थे। संस्था ने धीरे-धीरे अपना कार्य करना आरंभ कर दिया। आज संस्था में चार हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।
संस्था के सदस्यों के प्रयास से अभी तक साढ़े पांच हजार से अधिक मरीजों को रक्त उपलब्धता कराने का नेक कार्य किया है। आस-पास के जिलों में कहीं भी किसी मरीज को रक्त की जरुरत पड़ती है, तो मैसेज सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आने लगते हैं। जिसके बाद रक्त की जरुरत को पूरा करने का भरसक प्रयास किया जाता है। पेशे से मेडिकल स्वामी अनुज कुमार ने बताया कि वह अब तक 200 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं। रक्तदान करने के बाद उन्हें काफी अच्छा लगता है। वह कहते है ताउम्र में इस कार्य में लगा रहूंगा और लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रेरित करना अपना धर्म समझूंगा।
रक्तदान के इस महासमर में मिले अपने जैसे भी
अनुज बताते है जब हमारे पास किसी मरीज को ब्लड़ की जरुरत के लिए खबर आती है, तो हम उस क्षेत्र से जुडे सदस्यों को भी अवगत कराते हैं। जिसके बाद मदद मिल जाती है। मेरे साथ मुरादाबाद निवासी सौरभ त्यागी, रामपुर से नलिन चौधरी, कबड्डी खिलाड़ी सुनील यादव, संभल से नावेद व विशाल शर्मा के अलावा असमौली से इकबाल कंधे से कंधे मिलाकर कार्य को अंजाम देते है। किसी की जान हमारे एक प्रयास से बच जाए तो लगता है,यह मानव जीवन सफल हो गया।
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