बड़ा फैसला
केंद्र के विभिन्न विभागों में आगामी 18 माह में दस लाख नई भर्तियां की जाएंगी। मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए। समझा जा रहा है कि रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच केंद्र ने नई भर्तियां करने …
केंद्र के विभिन्न विभागों में आगामी 18 माह में दस लाख नई भर्तियां की जाएंगी। मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए। समझा जा रहा है कि रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच केंद्र ने नई भर्तियां करने का फैसला लिया है। साथ ही सुरक्षा मामलों की समिति ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सशस्त्र सेनाओं में जवानों की भर्ती के लिए नई योजना ‘अग्निपथ’ को भी मंजूरी दी, जिसके तहत पहले वर्ष में तीनों सेनाओं में 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी।
इससे युवकों के लिए रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही, साथ ही सरकार को इससे फायदा भी होगा। सशस्त्र बलों से रिटायर होने वाले सैनिकों को केंद्र सरकार को अच्छी खासी रकम विभिन्न मदों में देना पड़ती है। सेना में अनुबंध पर भर्ती शुरू होने पर सरकार को इन तमाम आर्थिक फायदों के अलावा पेंशन जैसे वित्तीय बोझ से भी छुटकारा मिल जाएगा। अग्निवीर योजना के तहत छह महीने का प्रशिक्षण और साढ़े तीन साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी किया जाएगा। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्तमान में सेना, वायु सेना और नौसेना में 1,25,364 रिक्तियां हैं।
सरकार का दावा है कि अग्निपथ योजना युवाओं को अपना व देश का सुनहरा कल बनाने का एक अद्भुत अवसर है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें 11.71 लाख रूपए कर मुक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा, जिससे वो आर्थिक रूप से भी सशक्त होंगे। गौरतलब है कि बीते चार वर्षों से सेना में जवानों की भर्तियां नहीं हुई हैं। अग्निपथ योजना की घोषणा के बाद से अब सेना, वायु सेना और नौसेना में होने वाली भर्तियां नए सिरे से होंगी।
इससे पहले होने वाली वह सभी भर्ती परीक्षाएं जिनके परिणाम लंबित हैं, उन्हें अब रद माना जाएगा। चिंता की बात है कि अब सेना में जवानों की भर्ती महज चार साल के लिए, ‘ठेके’ पर, की जाएगी। सेना में पहले सेवाकाल की औसतन उम्र 15 साल होती थी। वह नौकरी करने के बाद उसे पेंशन भी दी जाती रही है। एक निश्चितता रहती थी। पूर्व सैनिक के तौर पर भी कई सेवाओं में नौकरियां मिल जाती थीं। नई संभावित व्यवस्था पर देश के रक्षा विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि सरकार किस आधार पर सेना को भी ठेके पर धकेल रही है? क्या यह निर्णय देश की सुरक्षा की दृष्टि से उचित कहा जा सकता है?
