मुरादाबाद : सास, बेटा-बहू सम्मेलन जगाएंगे परिवार नियोजन की अलख
अमृत विचार,मुरादाबाद। परिवार नियोजन की सेवाएं बेहतर बनाने के लिए जिले भर में सास, बेटा-बहू सम्मेलन का आयोजन 20 जून से दो जुलाई के बीच उपकेंद्र स्तर पर किए जाएंगे। हर सम्मेलन में आशा और उनके साथ 14-18 प्रतिभागी शामिल होंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने कहा कि इस सम्मेलन में अधिक से …
अमृत विचार,मुरादाबाद। परिवार नियोजन की सेवाएं बेहतर बनाने के लिए जिले भर में सास, बेटा-बहू सम्मेलन का आयोजन 20 जून से दो जुलाई के बीच उपकेंद्र स्तर पर किए जाएंगे। हर सम्मेलन में आशा और उनके साथ 14-18 प्रतिभागी शामिल होंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने कहा कि इस सम्मेलन में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। जिला परिवार नियोजन प्रबंधक दीपक कुमार ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य सास बहू के बीच संबंध, समन्वय और संवाद के जरिये बेटे के सहयोग से परिवार नियोजन को लेकर बेहतर माहौल बनाना है। जिससे वह अपनी अवधारणाओं, व्यवहार एवं विश्वास में बदलाव ला सकें। परिवार में अधिकतर निर्णय में पुरुष की सहमति सर्वोपरि होती है। इसलिए सास-बहू सम्मेलन के दौरान पुरुष सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए बेटे का प्रतिभाग किया जाना आवश्यक है। सास-बहू सम्मेलन से मतलब सास, बेटा-बहू सम्मेलन से है।
उपकेंद्र स्तर पर आयोजित होंगे सम्मेलन
सास बेटा-बहू सम्मेलन का आयोजन उपकेंद्र स्तर पर आयोजित होगा। प्रत्येक उपकेंद्र पर 10-20 आशा कार्यकर्ता होती हैं। सम्मेलन दो-तीन आशा कार्यकर्ताओं के कार्य क्षेत्र को मिला कर एक स्थान पर आयोजित होगा। सम्मेलन की तैयारी एएनएम और आशा कार्यकर्ता के संयुक्त प्रयास से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में की जाएगी। सम्मेलन में कम्युनिटी हेल्थ आफिसर द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।
सम्मेलन में आयोजित होंगी यह गतिविधियां
सम्मेलन में प्रतिभागियों का आपस में परिचय, गुब्बारा खेल के जरिये छोटे परिवार का महत्व, परिवार नियोजन में स्थायी साधनों की जानकारी, परिवार नियोजन के लिए बास्केट ऑफ च्वाइस के आधार पर अस्थाई साधनों के बारे में जानकारी, प्रसव के बाद परिवार नियोजन साधन, गर्भ समापन के बाद परिवार नियोजन साधन की जानकारी, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, शगुन किट वितरण तथा पुरस्कार वितरण आदि कार्यक्रम होंगे।
यह होंगे प्रतिभागी
1. ऐसे दंपति, जिनका विवाह एक वर्ष के भीतर हुआ हो।
2. उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाएं।
3. दंपति, जिन्होंने परिवार नियोजन का कोई साधन नहीं अपनाया हो।
4. ऐसे दंपति जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं।
5. ऐसे आदर्श दंपति जिनके विवाह के दो वर्ष बाद बच्चा हुआ हो ।
6. ऐसे दंपति जिनके पहले बच्चे और दूसरे बच्चे के जन्म के बीच कम कम तीन साल का अंतराल हो।
7. ऐसे दंपति, जिन्होंने दो बच्चे के बाद परिवार नियोजन का स्थायी साधन अपनाया हो।
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