मुरादाबाद : भंग होगी सीडब्ल्यूसी अमरोहा, आयोग ने लिखा पत्र

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मुरादाबाद,अमृत विचार। जेजे एक्ट को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी अमरोहा के जिस बाल कल्याण समिति के कंधे पर है, उसने कानून ही नहीं, हद लांघते हुए मर्यादा तक की दीवार तोड़ दी। प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अमरोहा सीडब्ल्यूसी की इस कारगुजारी को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। पत्र के …

मुरादाबाद,अमृत विचार। जेजे एक्ट को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी अमरोहा के जिस बाल कल्याण समिति के कंधे पर है, उसने कानून ही नहीं, हद लांघते हुए मर्यादा तक की दीवार तोड़ दी। प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अमरोहा सीडब्ल्यूसी की इस कारगुजारी को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए नाबालिग बेटी को जहां उसके जैविक मां-बाप की सुपुर्दगी का आदेश दिया गया है, वहीं प्रकरण में बाल कल्याण समिति की भूमिका को सवालों के कटघरे में खड़ा करते हुए न्यायपीठ को भंग करने की संस्तुति की गई है। आयोग के सख्त रुख से फौजी पिता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अमृत विचार ने 23 जून के अंक में “फौजी पिता के सीने में सीडब्ल्यूसी अमरोहा ने बोया कांटा” शीर्षक से प्रकाशित की थी। खबर के जरिए अमरोहा सीडब्ल्यूसी की तटस्थ भूमिका पर जहां सवाल उठाए गए। बहन-बहनोई के छल के शिकार फौजी की पत्नी को जब पति की वेदना ने असहज किया, तब उसने बाल कल्याण समिति मुरादाबाद का दरवाजा खटखटाया। महिला ने बताया कि उसकी नाबालिग बड़ी बेटी अमरोहा के गजरौला में बहनोई के घर है। बहन-बहनोई के हाथ वर्षों पहले मासूम बेटी को सौंपने की असल कहानी बताते हुए महिला ने लाडो को वापस दिलाने की गुहार सीडब्ल्यूसी से लगाई।

सीडब्ल्यूसी अमरोहा ने की है अस्थायी सुपुर्दगी सुनिश्चित
सीडब्ल्यूसी ने जब नोटिस दिया तो आरोपी दंपती मां-बाप के सुपुर्द बेटी सौंपने की बजाय खेल में जुट गए। अमरोहा सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश होकर उन्होंने बच्ची को जबरिया हथियाने की कोशिश की। इस प्रयास में बहन की बेटी को परित्यक्ता तक घोषित किया गया। आरोपियों की घोषणा पर विश्वास कर सीडब्ल्यूसी अमरोहा ने अस्थायी सुपुर्दगी भी सुनिश्चित कर दी। आरोपी व सीडब्ल्यूसी सदस्यों की मनमानी आम होते बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कान खड़े हो गए। जांच में पता चला कि अमरोहा सीडब्ल्यूसी ने अपने अधिकार ही नहीं, बल्कि जेजे एक्ट का भी खुला उल्लंघन किया है। अमरोहा सीडब्ल्यूसी को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते आयोग ने डीएम को पत्र लिखा। पत्र के जरिए नाबालिग बेटी को उसके जैविक मां-बाप के सुपुर्द करने का आदेश दिया गया है।

अमरोहा बाल कल्याण समिति ने अधिकारों का दुरुपयोग कर गैर कानूनी तरीके से किशोरी का संरक्षक उसके मौसा-मौसी को बनाया है। किशोरी जैविक मां-बाप के सुपुर्द करने का आदेश देते हुए सीडब्ल्यूसी पर कार्रवाई हेतु डीएम अमरोहा को पत्र लिखा गया है। पूरे घटना पर आयोग की नजर गड़ी है। -शुचिता चतुर्वेदी, सदस्य-बाल अधिकार संरक्षण आयोग यूपी

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