किसकी जेब में गई ढाई सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया यह बड़ा प्रोजेक्ट

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आगरा, अमृत विचार। यूपी में शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की प्रदेश सरकार की मंशा को उसके ही अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। घपलों-घोटालों के लिए मशहूर यह अफसर किसी भी योजना को अंजाम तक तो पहुंचाते हैं मगर केवल दिखावे के लिए। एक मामला यूपी के आगरा में सामने आया …

आगरा, अमृत विचार। यूपी में शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की प्रदेश सरकार की मंशा को उसके ही अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। घपलों-घोटालों के लिए मशहूर यह अफसर किसी भी योजना को अंजाम तक तो पहुंचाते हैं मगर केवल दिखावे के लिए। एक मामला यूपी के आगरा में सामने आया है जहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आईसीसीसी यानी इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर का प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए 282 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम जारी कर दी गई है लेकिन ना तो पूरी तरह से कैमरे काम कर रहे और ना ही ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम। शहर में 43 जगहों पर पैनिक अलार्म बटन लगाए गए थे जिनमें से ज्यादातर ठप्प हैं। ये लापरवाही सीधे तौर पर इशारा करती है कि प्रोजेक्ट के तहत शहर को स्मार्ट बनाया गया या इसके जरिये भ्रष्टाचारियों ने अपनी जेबें भर ली हैं।

बताते चलें कि शहर में आईसीसीसी के तहत 63 जंक्शन पर 1176 कैमरे लगाए गए थे लेकिन कई सैकड़ा कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। जिम्मेदार दावा कर रहे हैं कि एक हज़ार से ज़्यादा कैमरे काम कर रहे हैं लेकिन हकीकत इससे उलट है। ये केवल शोपीस बने हैं। इसी कड़ी में प्रोजेक्ट के तहत पैनिक अलार्म बटन 43 जगहों पर लगाए गए थे। जिनका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जाता है लेकिन वो भी खराब हैं। ऐसे में अगर आप इन अलार्म से किसी तरह कि मदद चाहते है तो आप भगवान भरोसे हैं। पॉल्यूशन सेंसर भी यहाँ लापता है। शहर का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम बिगड़ा पड़ा है। हालाँकि इसको लेकर ज़िम्मेदार अधिकारी कार्यदायी संस्था पर जुरमाना लगाने की बात कहते हैं लेकिन सवाल है कि इससे शहर वालों को क्या फायदा होगा ।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हो रहे विकास कार्यों पर जनप्रतिनिधि भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों की मनमानी चल रही है ना कैमरे काम कर रहे हैं और ना ही कई सालों से ताजगंज में गलियों की सड़कों का निर्माण कार्य पूरा हो पाया है, ऐसे में वो अब इसकी शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ से करेंगे।

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