बिजनौर : स्वास्थ्य विभाग में बड़ा घोटाला, बिना जीपीएस और लॉग बुक तैयार किए ही कर दिया पांच करोड़ का भुगतान
बिजनौर,अमृत विचार। लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने जिलेभर में पीएचसी और जिला मुख्यालय पर लगी गाड़ियों का रिकॉर्ड खंगाला तो, सामने आया कि शासन से टेंडर और भुगतान के लिए बनाए गए नियमों का पिछले पांच सालों से उल्लंघन किया जा रहा है। बिना जीपीएस और लॉग बुक तैयार किए ही …
बिजनौर,अमृत विचार। लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने जिलेभर में पीएचसी और जिला मुख्यालय पर लगी गाड़ियों का रिकॉर्ड खंगाला तो, सामने आया कि शासन से टेंडर और भुगतान के लिए बनाए गए नियमों का पिछले पांच सालों से उल्लंघन किया जा रहा है। बिना जीपीएस और लॉग बुक तैयार किए ही करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। जांच में मामला उजागर होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
सोमवार को टीम ने कई अस्पतालों में रिकॉर्ड खंगाले। इस दौरान टीम को प्रत्येक माह करीब 28 हजार प्रति गाड़ी के हिसाब से 35 गाड़ियों का भुगतान किया हुआ मिला, जो पांच सालों में पांच करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया गया है। पिछले दिनों भी स्वास्थ्य विभाग एनएचएम आदि घोटालों को लेकर काफी चर्चाओं में रहा है, पिछले दिनों लखनऊ से जिला सीएमओ कार्यालय आई जांच टीम ने विभागीय खरीद फरोख्त में बड़े स्तर की जीएसटी चोरी के मामले पकड़ने के बाद अब एनएचएम में गाड़ियों के भुगतान में बड़ा घोटाला सामने आ रहा है।
जांच अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में जिला बिजनौर की सभी पीएचसी के लिए गाड़ियों का टेंडर किए गए थे। इसके बाद प्रत्येक वर्ष टेंडर करने के नियम की अनदेखी करप 2017 से वर्ष 2018 तक कोई टेंडर नहीं किया गया। 2016 को जिन फर्मों को टेंडर दिया गया, उनसे ही काम लिया गया। 2019 में किए गए टेंडर से अभी तक उन्हीं फर्मों की गाड़ियां विभाग में चल रही हैं, जबकि सभी गाड़ियों में जीपीएस नहीं लगाए गए और भुगतान भी जीपीएस लॉग बुक के आधार पर नहीं किया। विभागीय निर्देश पर उक्त टेंडर भी उन्हीं फर्म को देना था, जो ट्रेवल एजेंसी, फर्म, सोसायटी, कंपनी, ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर्ड हों। साथ ही गाड़ियां भी आरटीओ से टैक्सी परमिट वाली हों, इसके अलावा भी अन्य कई नियम का मनमाने तरीके से उल्लंघन किया गया था।
खरीद-फरोख्त में जीएसटी चोरी का मामला आया सामने
सीएमओ कार्यालय में पिछले दिनों जांच टीम ने खरीद-फरोख्त में बड़े स्तर पर जीएसटी की चोरी पकड़ी थी, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की जमकर फजीहत हुई थी।
नजीबाबाद पीएचसी पर निजी कंपनी का एमआर देता था दवाई
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पूर्व प्रभारी डॉ. फैज हैदर की शह पर एक निजी कंपनी का मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव उनके सरकारी कार्यालय में चिकित्सक की कुर्सी पर बैठकर ठाठ से मरीज देखता था। अपनी कंपनी की दवाइयां लिखता था। इस मामले में शिकायत की गई, लेकिन सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल के इशारे पर जांच को गलत दिशा में मोड़ कर निस्तारित कर दिया गया। इससे भ्रष्टाचार की जड़ स्वास्थ्य विभाग के अंदर तक मौजूद है।
अर्बन पीएचसी पर नहीं बैठते चिकित्सक
नजीबाबाद अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहल्ला रमपुरा मलीन बस्ती में दो निजी चिकित्सक बैठते हैं। जिनमें शिकायत के बाद एक चिकित्सक तो कुछ समय के लिए बैठने लगे, लेकिन दूसरे चिकित्सक डॉ एके गर्ग पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और वह अपने नर्सिंग होम में बैठकर लगातार सरकारी तनख्वाह ले रहे हैं। सीएमओ डॉक्टर विजय गोयल इस मामले में जानते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। जब स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी ही लापरवाह हो जाएंगे तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि छोटे कर्मचारी किस तरह काम करते होंगे। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय कुमार गोयल से इस संबंध में फोन पर जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं की। इस संबंध में सीएमओ से बात होने पर उनका पक्ष की प्रकाशित किया जाएगा।
ये भी पढ़ें : बिजनौर : पेड़ के नीचे दबकर सहकारी समिति कर्मी की मौत, परिवार में कोहराम
