शाहजहांपुर: रामायण डीक्लासिफाइड पुस्तक का विरोध, एसपी को सौंपा पत्र

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शाहजहांपुर, अमृत विचार। नगर के मोहल्ला वर्कजई निवासी राजेश अवस्थी ने अपने साथियों के साथ मंगलवार को एसपी से मिलकर रामायण डीक्लासिफाइड पुस्तक का विरोध किया है। उन्होंने साफ कहा कि रामचरितमानस के समान एक नई किताब बनाकर धार्मिक ग्रंथ पर शहर निवासी साहनी टायर वालों ने टिप्पणी की है। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं …

शाहजहांपुर, अमृत विचार। नगर के मोहल्ला वर्कजई निवासी राजेश अवस्थी ने अपने साथियों के साथ मंगलवार को एसपी से मिलकर रामायण डीक्लासिफाइड पुस्तक का विरोध किया है। उन्होंने साफ कहा कि रामचरितमानस के समान एक नई किताब बनाकर धार्मिक ग्रंथ पर शहर निवासी साहनी टायर वालों ने टिप्पणी की है। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत की गई हैं। उन्होंने लेखक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग एसपी से की है।

एसपी को सौंपे गए पत्र में बताया कि हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्री रामचरित मानस के समान एक नई किताब डिक्लासिफाइड का विमोचन शहर के एक होटल में किया गया था। कहा कि महाकवि तुलसीदास के पावन ग्रंथ की महिमा हजारों वर्षों से सन्त मुनि, पुरोहित के मुखार बिंदु से सुना और घरों में श्रीराम चरित मानस का पाठ किया जाता है, किंतु शहर के दून इंटर नेशन के संचालक ने हमारे धार्मिक ग्रन्थ पर टिप्पणी की, जिससे सभी हिन्दू समाज को गहरा अघात पहुंचा है।

उन्होंने बताया कि डिक्लासिफाइड में धार्मिक ग्रंथ का मजाक उड़ाते हुए चौपाई के गलत अर्थ निकाले गए हैं। उन्होंने बताया किताब में दर्शाया कि सीता स्वयंवर नहीं हुआ, लक्ष्मण ने रेखा नहीं खींचीं, सुसेन वैद्य लंका का नहीं था, रावण की नाभि में अमृत नहीं था, गौतम भट ऋषि को गौतम बुध से जोड़ा, हनुमान जी पर्वत सहित संजीवनी नहीं लाए। इस दौरान राजीव अवस्थी, गोविंद मिश्रा, आशीष वर्मा, अमित, विशू, आर्यन, अंकित, सौरभ मिश्रा, सुनील सक्सेना आदि मौजूद रहे।

महर्षि बाल्मीकि की रामायण के श्लोक पर लिखी है पुस्तक: जसमीत
रामायण डीक्लासिफाइड पुस्तक के लेखक डॉ. जसमीत साहनी का कहना है कि इस पुस्तक में जो भी लिखा है, वह महर्षि बाल्मीकि की रामायण के श्लोक पर लिखा है। खुद किसी शब्द को नहीं जोड़ा है। मैं खुद सनातन संस्कृति से जुड़ा व्यक्ति हूं, इसलिए अपनी संस्कृति के खिलाफ लिखने की कल्पना नहीं कर सकता। यदि इस पुस्तक का एक भी शब्द सनातन संस्कृति के विरोध का है तो मुझे जो सजा दी जाएगी, वह कबूल होगी।

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